श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण
Shrimad Valmiki Ramayana
महर्षि वाल्मीकि द्वारा
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‘पति-सेवाके सम्बन्धमें भले ही तुम्हें कोई उपदेश देनेकी आवश्यकता न हो; किंतु इतना तो मुझे अवश्य बता देना चाहिये कि ये श्रीराम ही तुम्हारे सबसे बड़े देवता हैं’॥ ३७ ॥
इस प्रकार दोनों पुत्रों और सीताको आदेश एवं उपदेश देकर रघुवंशी राजा दशरथ विमानके द्वारा इन्द्रलोकको चले गये॥ ३८ ॥
नृपश्रेष्ठ महानुभाव दशरथ अद्भुत शोभासे सम्पन्न थे। उनका शरीर हर्षसे पुलकित हो रहा था। वे विमानपर बैठकर सीतासहित दोनों पुत्रोंसे विदा ले देवराज इन्द्रके लोकमें चले गये॥ ३९ ॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें एक सौ उन्नीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ११९ ॥