श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण
Shrimad Valmiki Ramayana
महर्षि वाल्मीकि द्वारा
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१. गार्हपत्य, आहवनीय और दक्षिणाग्निरु।
२. प्रभु-शक्ति, उत्साह-शक्ति तथा मन्त्र-शक्ति—ये तीन शक्तियाँ हैं।
३. ऋग्, यजु और साम—ये तीन वेद हैं।
४. वात, पित्त और कफ—इनके प्रकोपसे उत्पन्न होनेवाले तीन प्रकारके रोग हैं।
५. ये तीन देवियाँ हैं, जो क्रमशः लज्जा, शोभा-सम्पत्ति और कीर्तिकी अधिष्ठात्री मानी गयी हैं।