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श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

Shrimad Valmiki Ramayana

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

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श्रीराम! इसके बाद रावण समूची पृथ्वीपर दिग्विजयके लिये भ्रमण करने लगा। उसने इधर-उधर जाकर बहुत-से महापराक्रमी क्षत्रियोंको पीड़ा पहुँचायी॥

कितने ही तेजस्वी क्षत्रिय जो बड़े ही शूरवीर और रणोन्मत्त थे, रावणकी आज्ञा न माननेके कारण सेना और परिवारसहित नष्ट हो गये॥ ४८ ॥

दूसरे क्षत्रियोंने, जो बुद्धिमान् माने जाते थे और उस राक्षसको अजेय समझते थे, उस बलाभिमानी निशाचरके सामने अपनी पराजय स्वीकार कर ली॥ ४९ ॥

इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें सोलहवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ १६ ॥