श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण
Shrimad Valmiki Ramayana
महर्षि वाल्मीकि द्वारा
पृष्ठ 2434, कुल 2621 में से
संदर्भ में पढ़ेंतैंतालीसवाँ सर्ग
भद्रका पुरवासियोंके मुखसे सीताके विषयमें सुनी हुई अशुभ चर्चासे श्रीरामको अवगत कराना
वहाँ बैठे हुए महाराज श्रीरामके पास अनेक प्रकारकी कथाएँ कहनेमें कुशल हास्यविनोद करनेवाले सखा सब ओरसे आकर बैठते थे॥ १ ॥
उन सखाओंके नाम इस प्रकार हैं—विजय, मधुमत्त, काश्यप, मङ्गल, कुल, सुराजि, कालिय, भद्र, दन्तवक्त्र और सुमागध॥ २ ॥
ये सब लोग बड़े हर्षसे भरकर महात्मा श्रीरघुनाथजीके सामने अनेक प्रकारकी हास्य-विनोदपूर्ण कथाएँ कहा करते थे॥ ३ ॥
इसी समय किसी कथाके प्रसङ्गमें श्रीरघुनाथजीने पूछा— ‘भद्र! आजकल नगर और राज्यमें किस बातकी चर्चा विशेषरूपसे होती है?॥ ४ ॥
‘नगर और जनपदके लोग मेरे, सीताके, भरतके, लक्ष्मणके तथा शत्रुघ्न और माता कैकेयीके विषयमें क्या-क्या बातें करते हैं? क्योंकि राजा यदि आचारविचार से हीन हों तो वे अपने राज्यमें तथा वनमें (ऋषि-मुनियोंके आश्रममें) भी निन्दाके विषय बन जाते हैं— सर्वत्र उन्हींकी बुराइयोंकी चर्चा होती है’॥ ५-६ ॥
श्रीरामचन्द्रजीके ऐसा कहनेपर भद्र हाथ जोड़कर बोला— ‘महाराज! आजकल पुरवासियोंमें आपको लेकर सदा अच्छी ही चर्चाएँ चलती हैं’॥ ७ ॥
‘सौम्य! पुरुषोत्तम! दशग्रीव-वधसम्बन्धी जो आपकी विजय है, उसको लेकर नगरमें सब लोग अधिक बातें किया करते हैं’॥ ८ ॥
भद्रके ऐसा कहनेपर श्रीरघुनाथजीने कहा— ‘पुरवासी मेरे विषयमें कौन-कौन-सी शुभ या अशुभ बातें कहते हैं, उन सबको यथार्थरूपसे पूर्णतः बताओ। इस समय उनकी शुभ बातें सुनकर जिन्हें वे शुभ मानते हैं उनका मैं आचरण करूँगा और अशुभ बातें सुनकर जिन्हें वे अशुभ समझते हैं, उन कृत्योंको त्याग दूँगा॥ ९-१० ॥
‘तुम विश्वस्त और निश्चिन्त होकर बेखटके कहो। पुरवासी और जनपदके लोग मेरे विषयमें किस प्रकार अशुभ चर्चाएँ करते हैं’॥ ११ ॥