श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण
Shrimad Valmiki Ramayana
महर्षि वाल्मीकि द्वारा
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शक्तिका परिचय दे दिया। पृथ्वीनाथ! इन्द्रके प्रयत्नसे उसी शूलके द्वारा राजा मान्धाताका विनाश हुआ था॥ २४-२५ ॥
‘महात्मन्! कल सबेरे जब वह शूल लिये बिना ही मांसका संग्रह करनेके लिये निकलेगा, तभी तुम उसका वध कर डालोगे, इसमें संशय नहीं है। नरेन्द्र! अवश्य तुम्हारी विजय होगी’॥ २६ ॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें सरसठवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ६७॥