श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण
Shrimad Valmiki Ramayana
महर्षि वाल्मीकि द्वारा
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‘महाराज! गंगाजीके गिरनेका वेग यह पृथ्वी नहीं सह सकेगी। मैं त्रिशूलधारी भगवान् शङ्करके सिवा और किसीको ऐसा नहीं देखता, जो इन्हें धारण कर सके’॥ २४ ॥
राजासे ऐसा कहकर लोकस्रष्टा ब्रह्माजीने भगवती गंगासे भी भगीरथपर अनुग्रह करनेके लिये कहा। इसके बाद वे सम्पूर्ण देवताओं तथा मरुद्गणोंके साथ स्वर्गलोकको चले गये॥ २५ ॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें बयालीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ४२॥