भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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( ५ )

कामेन विजितो ब्रह्मा, कामेन विजितो हरिः ।

कामेन विजितः शम्भु, शक्रः कामेन निजितः ॥

अर्थात् कामदेवने ब्रह्मा, विष्णु, महेश और सुरेश—इन चारोंको जीत लिया। जब भगवान् कामदेवने ऐसों-ऐसोंको हो अपने वशमें करके, मनमाने नाच नवाये, तब और किस की कही जाय ? सार्रांश यह, भगवान् कामदेव सबसे अधिक बलवान् हैं ; इसीसे कवि महोदय, सब देवताओंको छोड़ भगवान् कामदेवको ही नमस्कार करते हैं।

पाश्चात्य विद्वानोंमेंसे एक गोथे नामक महापुरुष कहते हैं :—Cupid is even a rogue, and whoever trusts him is deceived.” कामदेव सदा छल करता है, जो उसका विश्वास करता है, वह धोखा खाता है। कोई कुछ कहे, हम तो यही कहेंगे कि, खूबसूरतोंमें बड़ी क्षमता है। खूबसूरती पुरुष को अपनी ओर उसी तरह खींचती है ; जिस तरह चुम्बक पत्थर लोहेको खींचता है। पोप महोदयने कहा भी है—“Beauty draws us with a single hair.” सुन्दरता एक बालके द्वारा भी हमको अपनी ओर खींच सकती है। चेनिंग महोदय भी कहते हैं—“Beauty is an all-pervading presence.” सौन्दर्य की सर्वत्र सत्ता है। मतलब यह है, कि पुरुष सौन्दर्य का दास है। जिसमें भी, बकौल लाबेल महाशयके “Earth’s noblest thing, a women perfected.” साध्वी की संसारका सर्वोत्तम पदार्थ है ; अतः ऐसे