भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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खुलासा—गरमी की ऋतुमें—फूलों की माला, पट्टों की हवा, चार चाँदनी और कमलनेत्री कामिनी प्रभृति शीतल और शान्ति-मय पदार्थोंका भोग कोई-कोई पुण्यवान ही कर सकते हैं। सबके लिये ये स्वर्गीय आनन्दके देनेवाले सामान मयस्सर हो नहीं सकते। जिन्होंने पूर्वजन्ममें पुण्य किया है, उनके ऊपर विष्णु-प्रिया लक्ष्मी की रूपा है, वे ही इनका सुख लूट सकते हैं।

दोहा ।

पुष्पमाल पंखा-पवन, चन्दन चन्द सुनारि ।

बैठ चाँदनी जल लहर, जेठमास पट धारि ॥३६॥

39 In summer season, it is only the fortunate people who derive pleasure by the enjoyment of the following—sweet smelling garlands, air of fans, moon-light, pollens of flowers, tanks, sandal dust, pure wine, white terrace of big palaces, fine clothes and the lotus-eyed beautiful maiden

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सथाशुभं धाम स्फुरद्भलररिमः यशधरः

प्रियावक्त्रात्मोजं मलयजरजश्चातिसुरभिः ।

वज्रो ह्यामोदास्तदिदमखिलं रागिणि जनै

करोत्यन्तः चोभं त यु विषयमंसर्गविमुखे ॥४०॥

• लिला-पुता साफ महल, निर्मल किरणोंवाला चन्द्रमा, प्यारीका सुखकमल, चन्दनकी रज और मनोहर फूलमाला—ये सब चीजें