भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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४२ हरिदास एण्ड कम्पनी, २०१ हरिसन रोड, कलकत्ता।

उस ज़मानेके हकीमोने बनाया था। क़लममें ताक़त नहीं, जो इस चूर्णके पूरे गुण लिख सके। यह चूर्ण खानेमें दिल-खुश और सुस्वादु है, अग्निको जगाता और भोजनको पचाता है। कौसाही अधिक खाना खा लीजिये, फिर पेट खाली-का-खाली हो जायगा। अजीर्ण (बदहज़मी) को पेटमें जाते ही भस्म कर देता है। खट्टी डकारें आना, जी मिचलाना, उल्टी होना, पेट सीरी रहना, पेट की हवा न खुलना, पेट या पेड़ूका कड़ा रहना, पेटमें गोला सा बना रहना, पाखाना साफ़ न होना आदि पेटके सारे रोगोंके नाश करनेमें रामवाण या विष्णु भगवानका सुदर्शन चक्र है। दाम छोटी शीशीका ॥) बड़ीका १) है।

कृष्णविजय तैल।

(चर्मरोगका शत्रु)

अगर आपको या आपके मित्र-पड़ोसियोंको खून-फ़िसादका रोग है, अगर बदनमें लाल रंग या काले रंग चकत्ते हो जाते हैं, अगर दाद, खाज, खुजली और फोड़े-फुन्सियोंसे शरीर खराब हो रहा है या शरीरमें घाव हैं, तो आप हमारा मशहूर "कृष्णविजय तैल" क्यों नहीं लगाते?

हमारे तीन बरसके परीक्षित "कृष्णविजय तैल"से सूखी-बोली खाज-खुजली, फोड़े-फुन्सी या गरमीकी सूजन, अपरस, सेंहुआ, सफेद दाग और भभूत आदि चमड़ेके ऊपर होनेवाले समस्त रोग जादूकी तरह आराम होते हैं। जिनका बिगड़ा खून अंग-