शृंगार शतक

शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
Devanagarihipublished544 पृष्ठ
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संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 84
भूहारशतक
हो मने ! उस कामिनी के पुष्ट स्तनों, मनोहर जाँघों और चन्द्रमुख को देखकर क्यों व्याकुल होते हो ? अगर तुम उसके कठोर कुचों और मनोहर जंघाओं वगैरः का आनन्द लेना चाहते हो, तो परोपकार-पुण्य सख्य करो ; अर्थात् सुन्दरी भुगतयनी पुण्य-कर्म करने से मिलती (पृष्ठ ४३)
Popular Press—Calcutta.