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शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

Devanagarihipublished544 पृष्ठ

हो। दास एण्ड कम्पनी, २०१ हरिसन रोड, कलकत्ता। ४३

रेजी सालसे की शीशियों-पर-शीशियाँ पीनेसे न आराम हुआ हो, जिनके शरीरके घाव अँगरेजी नामी दवा "कारबोलिक आयल" या "आयडोफार्म" से न आराम हुए हों, वे एक बार इस नामी "कृष्णविजय तेल" की परीक्षा जरूर करें। यह तेल कभी निष्फल नहीं होता। गये ३० बरसमें इसने लाखों रोगियों को सड़नेसे बचाया है। जिसके नाखून गल कर गिरे गये हों, यदि वह शस्त्र भी इस अमृत-समान "कृष्णविजय तेल" को कुछ दिन बराबर लगाता जावे, तो निस्सन्देह उसके फिर नये नाखून निकल आवेंगे। यदि यह "कृष्णविजय तेल" किसी अँगरेजी दवाखानेमें होता; तो अच्छे लेबल, चमकदार शीशी और दवाखानेके अनाप-शनाप खर्चके कारण २) रुपये शीशीसे कममें न बिकता, परन्तु हमने स्वदेशी दवाका प्रचार करने और गरीब-अमीर सबको फायदा पहुँचानेकी गुरुत्वे इसकी दश तोलेकी शीशीका दाम सिर्फ़ लागत मात्र १) रखवा है।

मस्तकशूलनाशक तेल।

(सिर-दर्द नाशक अद्भुत तेल)

इस तेलको स्नान करनेसे पहिले रोज़ सिरमें लगानेसे सिरके सारे रोग नाश हो जाते हैं। इसकी तरी की तारीफ़ नहीं हो सकती। यह तेल बालोंको काले-रसीले और चिकने रखता है। आँख-नकसे मैला पानी निकाल कर मगज़ और आँखोंको ठण्डा कर देता है। पढ़ने-लिखनेमें चित्त लगाता और माथेकी