भारतकोश
शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

महर्षि शुक्राचार्य द्वारा

स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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१२४शुक्रनीतिः

नहीं मानता है और जो अच्छी से अच्छी सेवा करने पर भी नहीं संतुष्ट होता है। एवं बात-चीत के प्रसङ्ग में भृत्य का कभी स्मरण नहीं करता है प्रत्युत उस पर शङ्का करता है एवं वृथा बात-चीत करता है और कुपित होकर मर्मवेधी वाक्य बोलता है, ऐसे राजा को भृत्य छोड़ दे (उसकी नोकरी न करे)।

लक्षणं युवराजादेः कृत्यमुक्तं समासतः ॥ ४३६ ॥ इति शुक्रनीतौ युवराजादिलक्षणं नाम द्वितीयोऽध्यायः समाप्तः।

इस प्रकार से युवराजादि का लक्षण तथा कृत्य संक्षेप से कहा गया।

इति शुक्रनीति-भाषानुवाद में युवराजादि-लक्षण नामक द्वितीय अध्याय समाप्त।


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