भारतकोश
शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

महर्षि शुक्राचार्य द्वारा

स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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पृष्ठ 290
२०४शुक्रनीतिः

अर्यंभावो बलं कोशो राष्ट्रवृद्धयै त्रयं स्त्रिदम् ॥ १६ ॥
**राष्ट्रवृद्धि के तीन कारण—**यज्ञ के लिये द्रव्य (धन) उत्पन्न हुआ है और यज्ञ स्वर्ग सुख एवं आयु की वृद्धि के लिये है, और शत्रु का अभाव, सेना, कोष ये तीनों राष्ट्र की वृद्धि के लिये हैं।

तद्बुद्धिर्नीतिनैपुण्यात् क्षमाशीलनृपस्य च ।
जायतेऽतो यतेतैव यावद्बुद्धिबलोदयम् ॥ १७ ॥
**नीति-निपुणता से कोशवृद्धि का यत्न करने का निर्देश—**क्षमाशील राजा की नीतिसंबन्धी निपुणता से ही उपर्युक्त विषयों की वृद्धि होती है अतः जितना बुद्धिबल हो उतना लगाकर वृद्धि के लिये प्रयत्न करना चाहिये।

मालाकारस्य वृत्त्यैव स्वप्रजारक्षणेन च ।
शत्रुं हि करदीकृत्य तद्धनैः कोशवर्धनम् ॥ १८ ॥
करोति स नृपः श्रेष्ठो मध्यमो वैश्यवृत्तितः ।
अधमः सेवया दण्डतीर्थदेवकरग्रहैः ॥ १९ ॥
**श्रेष्ठादिनृप के ३ लक्षण—**जो माली की भांति व्यवहार रखकर अर्थात् अपने बाग के वृक्षों को सींच कर जैसे माली उसकी रक्षा करता है उसी भांति प्रजा की रक्षा करने के साथ-साथ शत्रु को कर (मालगुजारी) देनेवाला बना-कर उनके धनों से कोश को बढ़ाता है वह नृप श्रेष्ठ कहलाता है, जो वैश्य-वृत्ति व्यवसाय आदि से कोश बढ़ाता है वह मध्यम, एवम् सेवा से तथा जुर्माना, तीर्थ स्थान तथा देवमन्दिरों पर कर लगाकर जो कोश बढ़ाता है वह अधम राजा कहलाता है।

प्रजा हीनधना रक्ष्या भृत्या मध्यधनाः सदा ।
यथाधिकम् प्रतिभुवोऽधिकद्रव्यास्तथोत्त्माः ॥ २० ॥
हीन धन तथा मध्यम धनवाली प्रजा की रक्षा वेतन देकर राजा को स्वामी की भांति करनी चाहिये। तथा अधिक धनवाली उत्तम प्रजा की रक्षा जामिनदार होकर करनी चाहिये।

धनिकाश्चोत्तमधना न हीना नाधिका नृपैः ।
क्योंकि उत्तम धनवाली धनिक प्रजा राजा से न हीन और न अधिक अर्थात् राजतुल्य होती हैं।

द्वादशाब्दप्रपूरं यद्धनं तन्नीचसंज्ञकम् ॥ २१ ॥
पर्याप्तं षोडशाब्दानां मध्यमं तद्धनं स्मृतम् ।
त्रिंशदब्दप्रपूरं स्यात् कुटुम्बस्योत्तमं धनम् ॥ २२ ॥
**नीचादि धन के लक्षण—**जो धन १२ वर्ष तक परिवार की रक्षा करने लायक होता है वह 'नीच' संज्ञक, जो १६ वर्ष तक रक्षा करने योग्य होता है