शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)
Shukra Niti of Shukracharya Hindi
महर्षि शुक्राचार्य द्वारा
स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंचतुर्थाध्याये कोशनिरूपणप्रकरणम् २१३
मूल्य घटाकर उसका मूल्य होगा। और शर्करा के समान हीरों के लिये प्रति सैकड़े ५० या ४० रत्ती का मूल्य घटाकर मूल्य होगा।
रत्नं न धारयेत् कृष्णं रक्तबिन्दुयुतं सदा ॥ ७५ ॥
**काले और रक्त बिन्दुवाले रत्न के न धारण का निर्देश—**और कृष्ण वर्ण के रत्नों पर यदि लाल रंग के बिन्दु हों तो उन्हें नहीं धारण करना चाहिये।
गारुत्मतं तूत्तमं चेन्माणिक्यं मूल्यमर्हतिः । सुवर्णं रक्तिमात्रं चेद् यथा रक्तिस्ततो गुरुः ॥ ७६ ॥
**माणिक्यादिकों का मूल्य-विचार—**यदि पन्ना और माणिक्य दोनों उत्तम हों तो उन दोनों के मूल्य समान होंगे अतः वे १ रत्ती के तौल के हों तो उनका १ सुवर्ण (१० माशे सोना) मूल्य होता है। और रत्ती के अनुसार मूल्य बढ़ता है।
रक्तिमात्रः पुष्परागो नीलः स्वर्णार्धमर्हतिः । चलत्रिसूत्रो वैदूर्यश्चोत्तमं मूल्यमर्हति ॥ ७७ ॥
१ रत्ती का पुखराज या नीलम का मूल्य आधा सुवर्ण (५ माशे सोना) होता है। और जिसमें चलते हुये ३ सूत्र दिखाई पड़े ऐसा वैदूर्यमणि उत्तम मूल्य का होता है।
प्रवालं तोलकमितं स्वर्णार्धं मूल्यमर्हति ।
१ तोले भर तौल के मूंगे का मूल्य आधा सुवर्ण (५ माशे सोना) होता है।
अत्यल्पमूल्यो गोमेदो नोन्मानं तु यतोऽर्हति ॥ ७८ ॥
**गोमेद के उन्मान के योग्य न होने का निर्देश—**गोमेद मणि अत्यन्त कम मूल्य का होता है। अतः उसका मूल्य तौल के ऊपर नहीं होता है।
संख्यातः स्वल्परत्नानां मूल्यं स्याद्धीरकाद्विना । अत्यन्तरमणीयानां दुर्लभानां च कामतः ॥ ७९ ॥ भवेन्मूल्यं मानेन तथातिगुणशालिनाम् ।
**अत्यन्त गुण वालों का मान से मूल्य न होने का निर्देश—**हीरे को छोड़कर क्षुद्र रत्नों का मूल्य संख्या से होता है। जो अत्यन्त सुन्दर तथा दुर्लभ हों उनका मूल्य आवश्यकतानुसार कम या अधिक होता है। और अत्यन्त गुण-शाली रत्नों का मूल्य तौल के अनुसार नहीं होता है।
व्यङ्घ्रिश्चतुर्दशहतो वर्गो मौक्तिकरक्तिजः ॥ ८० ॥ चतुर्विंशतिभिर्भक्तो लब्धान्मूल्यं प्रकल्पेत् । उत्तमं तु सुवर्णार्धमूनमूनं यथागुणम् ॥ ८१ ॥
**मोतियों की मूल्य-कल्पना—**मोती तौल में जितनी रत्तियों का हो,