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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

महर्षि शुक्राचार्य द्वारा

स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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पृष्ठ 318
२३२शुक्रनीतिः

हावभावादिसंयुक्तं नर्तनं तु कला स्मृता ।
अनेकवाद्यविकृतौ ज्ञानं तद्वादनं कला ॥ ६७ ॥

गान्धर्व वेदोक्त ७ कलाओं के लक्षण— १—हाव-भाव के साथ नाचने को 'नृत्यकला' कहते हैं । २—अनेक प्रकार के वाद्य यन्त्रों (बाजों) के बनाने तथा बजाने के ज्ञान को 'वाद्य' तथा 'वादन' कला कहते हैं ।

वस्त्रालङ्कारसंधानं स्त्रीपुंसोश्च कला स्मृता ।
अनेकरूपाविर्भावकृतिज्ञानं कला स्मृता ॥ ६८ ॥

३. स्त्री तथा पुरुष को वस्त्र तथा आभूषण को सुन्दर रीति से पहनाने को 'वस्त्रालङ्कार संधान' कला कहते हैं । ४. अनेक प्रकार के रूप-प्रगट करने की विधि का जानना 'रूप प्रकाशन कला' कहते हैं ।

शय्यास्तरणसंयोग-पुष्पादिग्रथनं कला ।
द्यूताद्यनेकक्रीडाभी रञ्जनं तु कला स्मृता ॥ ६९ ॥

५. शय्या तथा बिछोने को भलीभांति लगाकर उस पर पुष्प आदि को सुन्दर गूंथ या सजा कर रखने को भी कला कहते हैं । ६. द्यूत (जूआ) आदि अनेक क्रीडाओं (खेलों) द्वारा मनोरंजन करने को भी कला कहते हैं।

अनेकासनसन्धाने रतेर्ज्ञानं कला स्मृता ।
कलासप्तकमेतद्धि गान्धर्वे समुदाहृतम् ॥ ७० ॥

७. अनेक प्रकार का आसन करके रति (मैथुन) करने के ज्ञान को भी कला कहते हैं । इन ७ कलाओं का वर्णन 'गान्धर्ववेद' में किया गया है ।

मकरन्दासवादीनां मद्यादीनां कृतिः कला ।
शल्यगूढाहृतौ ज्ञानं शिराव्रणव्यधे कला ॥ ७१ ॥

आयुर्वेदोक्त १० कलाओं के लक्षण— ८. मकरन्द (पुष्परस) से आसवादि मादक द्रव्य तथा मद्यादि बनाने को भी कला कहते हैं । ९. गिरे हुये शल्य (विंधे हुये कांटा आदि) को सुखपूर्वक निकालने तथा सिराओं पर उत्पन्न हुये व्रण को शस्त्र से चीरने के ज्ञान को भी कला कहते हैं ।

हीङ्गादिरससंयोगा-न्नादिसंपाचनं कला ।
वृक्षादिप्रसवारोपपालनादिकृतिः कला ॥ ७२ ॥

१०. हींग आदि द्रव्यों तथा लवणादि रसों के संयोग से अन्नादि के पकाने को भी कला कहते हैं । ११. वृक्षादि के फलने, लगाने तथा रक्षा करके बड़ा करने की क्रिया को जानना भी कला कहते हैं ।

पाषाणधात्वादिद्रुतिस्तद्भस्मकरणं कला ।
यावदिक्षुविकाराणां कृतिज्ञानं कला स्मृता ॥ ७३ ॥

१२. पत्थरों का तोड़ना तथा स्वर्णादि धातुओं को गलाना और उनको