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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

महर्षि शुक्राचार्य द्वारा

स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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चतुर्थाध्याये सेनानिरूपणप्रकरणम् ३४१

यदि १ या ३ भौरियां हों तो वह 'भूपाल' संज्ञक अश्व होता है जो स्वामी को चक्रवर्ती राजा बना देता है ।

कण्ठे यस्य महावर्त्त एकः श्रेष्ठः प्रजायते ॥ ६४ ॥
चिन्तामणिः स विज्ञेयश्चिन्तितार्थसुखप्रदः ।

चिन्तामणि-संज्ञक अश्व के लक्षण तथा फल— जिसके कण्ठ में श्रेष्ठ एक बड़ी-सी भौंरी हो वह अश्व 'चिन्तामणि' संज्ञक होता है जो अभिलषित अर्थ तथा सुख को देनेवाला होता है ।

शुक्लाख्यौ भालकण्ठस्थौ आवर्तौ वृद्धिकीर्तिदौ ॥ ६५ ॥

शुक्ल-संज्ञक अश्व के लक्षण तथा फल— जिस अश्व के ललाट तथा शंख देश में जो भौरियां होती हैं वे दोनों 'शुक्ल' संज्ञक होती हैं और राज्य-धनादि की वृद्धि तथा कीर्ति को देनेवाली होती हैं ।

यस्यावर्त्तौ वक्त्रगतौ कुद्यन्ते वाजिनो यदि ।
स नूनं मृत्युमाप्नोति कुर्याद् वा स्वामिनाशनम् ॥ ६६ ॥

अनिष्टकारक अश्वों के लक्षण— जिस अश्व के कुक्षि के अन्त भाग में यदि टेढ़ी दो भौरियां हों तो वह निश्चय स्वयं मर जाय या अपने स्वामी का नाश करे ।

जानुसंस्था यदावर्त्तः प्रवासक्लेशकारकाः ।
वाजिमेढ़े यदावर्त्तो विजयश्रोविनाशनः ॥ ६७ ॥

जिस अश्व के जानुओं ( घुट्टों ) पर ३ भौरियां हों, उनसे स्वामी को परदेश में विशेष क्लेश होता है । घोड़े के यदि लिङ्ग में भौंरी हो तो वह विजय और श्री ( लक्ष्मी ) का नाशक होता है ।

त्रिकसंस्थो यदावर्त्तस्त्रिवर्गस्य प्रणाशनः ।
पुच्छमूले यदावर्त्तो धूमकेतुरनर्थकृत् ॥ ६८ ॥

धूमकेतु-संज्ञक भौंरी के लक्षण फल— जिसकी पीठ के त्रिकस्थान में भौंरी हो तो वह त्रिवर्ग ( धर्म, अर्थ, काम ) का नाशक होता है । घोड़े के पूंछ के मूल में जो भौंरी हो, वह 'धूमकेतु' संज्ञक है तथा अनर्थकारक होता है ।

गुह्यपुच्छत्रिकावर्ती स कृतान्तो भयप्रदः ।

कृतान्त-संज्ञक भौंरी के लक्षण व फल— जिस घोड़े की गुदा, पूंछ तथा त्रिकस्थान में भौंरी हो वह 'कृतान्त' संज्ञक होता है जो कि भयदायक होता है ।

मध्यदण्डा पार्श्वगमा सैव शतपदी कचे ॥ ६९ ॥
अतिदुष्टाङ्गुष्ठमिता दीर्घा दुष्टा यथा यथा ।

घोड़े के पूंछ के शुभाशुभ फल— जिसकी पूंछ दोनों पाश्र्वों की ओर जावे और मध्य में दण्ड के आकार का चिह्न हो एवं यह एक अंगुष्ठ बराबर लम्बा