भारतकोश
शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

महर्षि शुक्राचार्य द्वारा

स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

पृष्ठ 89, कुल 526 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 89

प्रथमोऽध्यायः

सकती, जिस प्रकार भोजन के बिना प्राणियों के देह की स्थिति नहीं रह सकती ॥

सर्वाभीष्टकरं नीतिशास्त्रं स्यात्सर्वसंमतम् ।
अत्यावश्यं नृपस्यापि स सर्वेषां प्रभुर्यतः ॥ १२ ॥

राजा का नीतिशास्त्र-ज्ञान में प्रयोजन—“लोगों के संपूर्ण अभीष्ट को सिद्ध करने वाला यह नीतिशास्त्र है”—इसे सभी स्वीकार करते हैं। और यह राजाओं के लिये भी अवश्य जानने योग्य है। क्योंकि राजा सभी लोगों का स्वामी है ॥

शत्रवो नीतिहीनानां यथाऽपथ्याशिनां गदाः ।
सद्यः केचित् कालेन भवंति न भवंति च ॥ १३ ॥

जिस प्रकार कुपथ्य भोजन करने वालों को कोई रोग शीघ्र और कोई देर में उत्पन्न होते हैं, एवं पथ्य से रहनेवालों को रोग नहीं उत्पन्न होते हैं, उसी प्रकार नीति से रहित लोगों के कोई शत्रु, शीघ्र और कोई देर से उत्पन्न होते एवं नीति से युक्त रहनेवालों के शत्रु नहीं उत्पन्न होते हैं ॥

नृपस्य परमो धर्मः प्रजानां परिपालनम् ।
दुष्टनिग्रहणं नित्यं न नीत्याऽतो विना ह्युभे ॥ १४ ॥

'नित्य प्रजाओं का पालन और दुष्टों का दमन करना' ये दोनों राजाओं के लिये परम धर्म हैं, और ये दोनों बिना नीतिशास्त्र के नहीं हो सकते हैं ॥

अनीतिरेव सच्छिद्रं राज्ञो नित्यं भयावहम् ।
शत्रुसंवर्धनं प्रोक्तं बलह्रासकरं महत् ॥ १५ ॥

नीतिरहित होना ही राजा के लिये महान् छिद्र (दोष) है, जो सदा भय देनेवाला, शत्रु की वृद्धि करनेवाला तथा अत्यन्त बल (सैन्य अथवा शक्ति) को क्षीण करनेवाला कहा हुआ है ॥

नीतिं त्यक्त्वा वर्त्तते यः स्वतंत्रः स हि दुःखभाक् ।
स्वतंत्रप्रभुसेवा तु असिधारावलेहनम् ॥ १६ ॥

अतः जो राजा नीति का त्याग कर उच्छृङ्खल व्यवहार करता है वह दुःख भोगता है। और उच्छृङ्खल राजा की सेवा करना तलवार की धार-चाटने के समान हानिकारक है ॥

स्वाराध्यो नीतिमान् राजा दुराराध्यस्त्वनीतिमान् ।
यत्र नीतिबले चोभे तत्र श्रीस्सर्वतोमुखी ॥ १७ ॥

नीति से युक्त राजा की सुखपूर्वक और अनीति से युक्त की दुःखपूर्वक आराधना की जा सकती है। जिस राजा के पास नीति तथा बल ये दोनों हैं उसके पास चारों तरफ से लक्ष्मी आती है ॥