श्वेताश्वतरोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Shvetashvatara Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंश्रीहरिः विषय-सूची विषय पृष्ठ १. शान्तिपाठ ... ... १ प्रथम अध्याय २. सम्बन्ध-भाष्य ... ... २ ३. जगत्-कारण ब्रह्मके स्वरूपके विषयमें ब्रह्मवादी ऋषियोंका विचार ... ५६ ४. काल, स्वभाव आदिकी जगत्-कारणताका खण्डन ... ५९ ५. ध्यानके द्वारा ऋषियोंको कारणभूता ब्रह्मशक्तिका साक्षात्कार ... ६२ ६. कारण-ब्रह्मका चक्ररूपसे वर्णन ... ... ७४ ७. कार्यब्रह्मका नदीरूपसे वर्णन ... ... ८३ ८. जीवके संसार-बन्धन और मोक्षके कारणका निर्देश ... ... ८५ ९. परब्रह्मकी प्राप्तिसे मुक्तिका वर्णन ... ... ८८ १०. व्यावहारिक भेद और ज्ञानद्वारा मोक्षका प्रदर्शन ... ... ९५ ११. ईश्वर, जीव और प्रकृतिकी विलक्षणता तथा उनके तत्त्व-ज्ञानसे ... मोक्षका कथन ... ... १०१ १२. प्रधान और परमेश्वरकी विलक्षणता तथा उनके तत्त्व-ज्ञानसे ... मोक्षका कथन ... ... १०७ १३. ब्रह्मके ज्ञान और ध्यान-जन्य फलोंमें भेद ... ... १०८ १४. ब्रह्मकी ज्ञातव्यता ... ... ११५ १५. प्रणव-चिन्तनसे ब्रह्म-साक्षात्कारका दृष्टान्तोंद्वारा समर्थन ... ११८ द्वितीय अध्याय १६. ध्यानकी सिद्धिके लिये सवितासे अनुज्ञा-प्रार्थना ... ... १२४ १७. सविताकी अनुज्ञाके बिना हानि ... ... १३१ १८. सविताकी अनुज्ञासे लाभ ... ... १३३ १९. ध्यानयोगकी विधि और उसका महत्त्व ... ... १३५ २०. प्राणायामका क्रम और उसकी महत्ता ... ... १३६ २१. ध्यानके लिये उपयुक्त स्थानोंका निर्देश ... ... १४२ २२. योगसिद्धिके पूर्वरक्षण ... ... १४३ २३. रोग, जरा और अकाल मृत्युपर विजय पानेके चिह्न ... १४५