भारतकोश
श्वेताश्वतरोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

श्वेताश्वतरोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Shvetashvatara Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished276 पृष्ठ

पृष्ठ 271, कुल 276 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 271

॥ श्रीहरिः ॥ ग्रन्थाकारमें उपलब्ध 'कल्याण' के पुराने, अति उपयोगी पुनर्मुद्रित विशेषाङ्क शिवाङ्क (सचित्र) [वर्ष ८, सन् १९३४ ई०]—इसमें शिवतत्त्व तथा शिव-महिमापर विशद विवेचनसहित शिवार्चन, पूजन, व्रत एवं उपासनापर तात्त्विक और ज्ञानप्रद मार्ग-दर्शन करानेवाली मूल्यवान् अध्ययन-सामग्री है। द्वादश ज्योतिर्लिङ्गोंका सचित्र परिचय तथा भारतके सुप्रसिद्ध शैव-तीर्थोंका प्रामाणिक वर्णन इसके अन्यान्य महत्त्वपूर्ण (पठनीय) विषय हैं। शक्ति-अङ्क (सचित्र) [वर्ष ९, सन् १९३५ ई०]—इसमें परब्रह्म परमात्माके आद्याशक्ति- स्वरूपका तात्त्विक विवेचन, महादेवीकी लीला-कथाएँ एवं सुप्रसिद्ध शाक्त-भक्तों और साधकोंके प्रेरणादायी जीवन-चरित्र तथा उनकी उपासना-पद्धतिपर उत्कृष्ट उपयोगी सामग्री संगृहीत है। इसके अतिरिक्त भारतके सुप्रसिद्ध शक्ति-पीठों तथा प्राचीन देवी-मन्दिरोंका सचित्र दिग्दर्शन भी इसकी उल्लेखनीय विषय-वस्तुके महत्त्वपूर्ण अङ्ग हैं। योगाङ्क (सचित्र) [वर्ष १०, सन् १९३६ ई०]—इसमें योगकी व्याख्या तथा योगका स्वरूप-परिचय एवं प्रकार और योग-प्रणालियों एवं अङ्ग-उपाङ्गोंपर विस्तारसे प्रकाश डाला गया है। साथ ही अनेक योग-सिद्ध महात्माओं और योग-साधकोंके जीवन-चरित्र तथा साधना-पद्धतियोंपर इसमें रोचक, ज्ञानप्रद वर्णन हैं। सारांशतः यह विशेषाङ्क सर्वसाधारण जनोंको योगके कल्याणकारी (अवदानों) और योग-सिद्धियोंके चमत्कारी प्रभावोंकी ओर आकृष्ट कर 'योग'के सर्वमान्य महत्त्वसे परिचय कराता है। संत-अङ्क (सचित्र) [वर्ष १२, सन् १९३८ ई०] संतोंकी महिमासे मण्डित, उनकी शिक्षाओं-उपदेशों और प्रेरणाओंसे पूरित यह 'संत-अङ्क' नित्य पठनीय और सर्वदा सेवनीय है। इसमें उच्चकोटिके अनेक संतों-प्राचीन, अर्वाचीन, मध्ययुगीन एवं कुछ विदेशी भगवद्विश्वासी महापुरुषों तथा त्यागी-वैरागी महात्माओंके ऐसे आदर्श जीवन-चरित्र हैं, जो पारमार्थिक गतिविधियोंके लिये प्रेरित करनेके साथ-साथ उनके सार्वभौमिक सिद्धान्तों एवं त्याग-वैराग्यपूर्ण तपस्वी जीवन-शैलीको उजागर करके उनके पारमार्थिक आदर्श, जीवन- मूल्योंको रेखाङ्कित करते हैं। और, किसीको भी उनके पद-चिह्नोंपर चलनेकी सत्प्रेरणा दे सकते हैं। साधनाङ्क (सचित्र) [वर्ष १५, सन् १९४१ ई०]—यह अङ्क उच्चकोटिके विचारकों, वीतराग महात्माओं, एकनिष्ठ साधकों एवं विद्वान् मनीषियोंके साधनोपयोगी अनुभूत विचारों और उनके साधनापरक बहुमूल्य मार्ग-दर्शनसे ओतप्रोत होनेसे महत्त्वपूर्ण है। इसमें साधना- तत्त्व, साधनाके विभिन्न स्वरूप-ईश्वरोपासना, योगसाधना, प्रेमाराधना आदि अनेक कल्याणकारी साधनों और उनके अङ्ग-उपाङ्गोंका शास्त्रीय विवेचन है। अतः सभीके लिये विशेषतः आत्मकल्याणकामी पुरुषोंके लिये यह उत्तमोत्तम दिशा-निर्देश है। संक्षिप्त महाभारत (सचित्र-दो खण्डोंमें) [वर्ष १७, सन् १९४३ ई०]—धर्म, अर्थ, काम, मोक्षके महान् उपदेशों एवं प्राचीन ऐतिहासिक घटनाओंके उल्लेखसहित इसमें ज्ञान, वैराग्य, भक्ति, योग, नीति, सदाचार, अध्यात्म, राजनीति, कूटनीति आदि मानव-जीवनके उपयोगी विषयोंका विशद वर्णन और विवेचन है। महाभारतकी अत्यधिक महिमा और अनेक महत्त्वपूर्ण विषयोंके समावेशके कारण इसे शास्त्रोंमें 'पञ्चम वेद' और विद्वत्समाजमें भारतीय ज्ञानका 'विश्वकोश' कहा गया है।

श्वेताश्वतरोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित) · पृष्ठ 271, कुल 276 में से · BharatKosha