भारतकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished723 पृष्ठ

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गुणनफल ८ × २ = १६ का मूल = ४ × २ = ८ = लघु । अतः महती ± लघु = योगान्तर = योग = क १८ । अन्तर = क. २ होता है । इसी प्रकार क ३ + क २७ से २७ + ३ = ३० महती, √२७ × ३ = ८१ का मूल × २ = ९ × २ = १८ = लघु अतः ३० ± १८ - क. ४८, क = १२ अथवा क ३ ± क ७ से लघु = १०, क ३ × क ७ = २१ का मूल नहीं मिलने से क ३ ± क ७ = क ३ ± क ७ यथावत् उत्तर होता है । "पृथक् स्थितिस्याद्यदिनास्तिमूलम्" कहा भी है । करणी अर्थात् अवर्गाङ्क अङ्कों का गुणन— गुण्य क २ + क ३ + क ८ को गुणक क ३ + ५ से गुणा करिये अवर्गाङ्क का सजातीय रूप ५ = क २५ समझ कर यदि सम्भव हो तो गुण्य गुणक में दी हुई कर- णियों का योग वियोग कर तब गुणा करने से गुणक के क २ + क ८ = क १८ अतः क १८ + क ३ से गुण्य क ३ + क २५ । यहाँ पर स्वतन्त्र रूप ५ = क २५ । क ३ + क २५ क ३ + क १८

क ९ + क ७५ + क ५४ + क ४५० । यहाँ पर क ९ अर्थात्— √९ = ३ होने से उत्तर = ३ + क ७५ + क ५४ + क ४५० गुणन की विलोम क्रिया से गुणक को = भाजक और गुणनफल को = भाज्य मानकर भाज्य में भाजक से भाग देने पर गुणांक ज्ञात हो जाता है । बीजगणित में कुट्टक गणित संक्षेप से कुट्टक गणित दिखाया जा रहा है । धान से चावल निकालने के लिये बार बार धान को कूटना पड़ता है इसी अभिप्राय से "कुट्टतीति कुट्टकः" इस गणित का नामकरण कुट्टक हुआ । प्रश्न है कि २२१ को किससे गुणा करें, और उस गुणनफल में ६५ जोड़ दें, और उसमें १९५ का भाग दें, तो वह संख्या निःशेष हो जाती है । प्रश्नानुसार भाज्यमान = २२१, हार या हर का मान = १९५ जोड़े जाने वाले अंक का मान क्षेपक = ६५ "भाज्यो हारः क्षेपकश्चापवर्त्यः केनाप्यादौ संभवे कुट्टकार्थम्" इत्यादि सूत्र से बड़े अंकों में यदि किसी १ अंक का अपवर्तन लग जाय तो गणित लाघव के लिए अपवर्तनाङ्क समझकर उससे अपवर्तन देना चाहिए । ध्यान रहे जिस अंक से भाज्य हार कट जाते हैं उस अंक से क्षेप में पूरा अपवर्तन लगना चाहिए, नहीं तो प्रश्न ही अशुद्ध समझा जाना चाहिए । अपवर्तनाङ्क की गवेषणा का उपाय बार बार २२१ ÷ १९५, गणित करने से अंतिम भाजक का अंक अपवर्तनाङ्क होता है ।