भारतकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished723 पृष्ठ

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ैहिकं" or does it have repha? No repha on 'जि' in स्वाजित! But wait, look at the next word: "पूर्वजन्मार्जितं" - here 'र्जि' has a clear repha. In "स्वाजित" it seems the repha was omitted in print, or is it there? It's omitted: "स्वाजितपुण्यमैहिकं". Wait, look at line 28: "स्वाऽऽयुषार्जिसतं" - wait, look at line 28: "स्वाऽऽयुषार्जिसतं" or "स्वाऽऽयुषार्जितं"? In line 28: "स्वाऽऽयुषार्जितं" or "स्वाऽऽयुषार्जिसतं"? Let's look closely at line 28: "त्वात्तेषां च भोगैकनाशयत्वेन तेषा सर्वेषां भोगार्थं यः कालः स एवाऽऽयुःसुकृतक्षय इत्य-" Wait, line 27: "त्वात्तेषां च भोगैव्यनाशयत्वेन तेषा सर्वेषां भोगार्थं यः कालः स एवाऽऽयुःसुकृतक्षय इत्य-" Wait, is it "भोगैव्यनाशयत्वेन" or "भोगैकनाश्यत्वेन"? In line 27: "भोगैकनाश्यत्वेन" -> look at 'क': it has a loop on left, curve on right. It is 'भोगैकना