भारतकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished723 पृष्ठ

पृष्ठ 32, कुल 723 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 32

यहाँ प्रस्तुत पृष्ठ का पंक्ति-दर-पंक्ति लिप्यन्तरण (transcription) दिया गया है:

( २५ ) कल्पना किया मू बं = ३२ हाथ । त्रु = मू अ त्रिभुज में मू त्रु = य अतः त्रु अ = ३२ - य । अतः भु² + को² = कर्ण² से, भुज² = (१६)² = २५६ होता है । तथा (३२ - य)² = १०२४ - ६४ य + य² + (१६)² नियमतः य² + २५६ = १०२४ - ६४ य + य² अतः ६४ य = ७६८ ∴ य = १२ मू त्रु उत्थापन से ३२ हाथ का बांस मूल से १२ हाथ की दूरी पर टूट कर ३२ - १२ = २० हाथ के तुल्य कर्ण का मान होता है । बीजगणित में वर्गात्मक अव्यक्त राशियों का गणित किसी भ्रमर झुण्ड के आधे का मूल मालती पुष्प में, समग्र भ्रमर झुण्ड का ८/९ अलिनी पुष्प में, शेष एक भ्रमर अपनी भ्रमरी की खोज में रात्रि में कमल पुष्प के निरुद्ध होने पर बारम्बार से रातभर अपनी नायिका का द्वार खटखटाता रहा, और