भारतकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished723 पृष्ठ

पृष्ठ 39, कुल 723 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 39

( ३२ ) पक्षों को - १ से गुणा करने पर य² - २८ = - ७५ दोनों में १४ का वर्ग जोड़ देने से य² - २८ + १९६ = १९६ - ७५ = य² - २८ य + १९६ = १२१ मूल लेने से, य - १४ = ११ अतः य = २५ = कर्ण का मान है । ∴ भु × को = ४२००/२५ = १६८ । चूंकि भु + को + क = ५६, कर्ण = २५ अतः भु + को = ५६ - २५ = ३१ होता है । पूर्व सूत्र से ४ × दो राशियों का गुणन दोनों राशियों का द्विगुणित गुणनफल के तुल्य होता है । भु × को × क = ४२०० । क = २५ अतः ४२००/२५ = १६८ = भु × को तथा (४ × १६८) = ६७२ = (भु × को) × ४ । ५६ - २५ = ३१ = भु + को अतः (३१)² = ९६१ = (भु + को)² अतः ९६१ - ६७२ = २८९ का मूल = १७ = भु और कोटि का अन्तर है । भु + को = ३१ है, संक्रमण गणित से ३१ + १७ = ४८ का आधा = २४ [L