सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)
Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ३४ ) ५ क - ६ न - ६ प ∴ य = —————————— = ( १ ) २ ३ क + १ न - १ प दूसरे तीसरे से य = —————————— = ( २ ) ३ ३ क - २ न + १ प तृतीय चतुर्थ से य = —————————— = ( ३ ) २ इस प्रकार य के तीन मान होकर इस समीकरण माध्यम से अब क का मान निकालना चाहिए। ५ क - ६ न - ६ प ३ क + १ न - १ प प्रथम द्वितीय से, —————————— = —————————— २ ३ अर्थात् १५ क - १८ न - १८ प = ६ क + २ न - २ प अतः ९ क = २० न - १६ प ८ न - ५ प २० न + १६ प अतः क = —————— = ———————— ३ ९ ∴ ७२ न - ४५ प = ६० न + ४८ प ९३ प ३१ प अतः १२ न = ९३ प ∴ न = ——— = ——— १२ ४ २५५ अतः ७६ × ३ = २२८ + ३१ - ४ = २५९ - ४ = ——— = ८५ = य ३ २० + १६ प ८ न - ५ य ∴ —————— = —————— ९ ३ = ६० न - ४८ प = ७२ न - ४५ प ९३ प ३१ प ∴ १२ न = ९३ प ∴ न = ——— = ——— १२ ४ पूर्व कथित कुट्टक गणित से गुणक मान यदि इष्ट ल मानने से न = लब्धि = ३१ ल प = गुणक = ४ = उत्थापन देने से क - ७६ ल (८ × ३१) = २४८ ल २० ल ———— २२८ ———— = ७६ ल ३