भारतकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

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स्थाने? Wait, look at जाorज्ञा? It is जातायनसंधिस्थाने. Wait, look at संधि: There is an anusvara, or is it जातायनसंभिस्थाने? No, जातायनसंधिस्थाने`.

Let's check line 29: भावाच्चेति चेत् । सत्रिभगहक्रान्तेर्गहायनवलनत्ववद्ग्रहक्रान्तावपि सत्रिभगहायनचलन Wait, सत्रिभगह or सत्रिभग्रह? In line 29: सत्रिभग्रहक्रान्तेर्ग्रहायनवलनत्ववद्ग्रहक्रान्तावपि सत्रिभग्रहायनचलन Wait, does it have ग्रह or गह? Look at सत्रिभ: then ग्र (has a slant stroke: ग्र!) क्रा न्ते र्गृ? It is र्ग्र (repha over ग्र): र्ग्रहायनवलनत्ववद्ग्रहक्रान्तावपि सत्रिभग्रहायन! Wait, is it चलन or वलन? Look at the character: ! सत्रिभग्रहायनवलन! Yes, वलन! (ayana-valana).

Let's check line 30: `त्वस्यार्थसिद्धत्व