सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)
Siddhanta Lesha Sangraha Hindi
श्रीमदप्पय्य दीक्षित द्वारा
स्रोत: Siddhanta Lesha Sangraha of Appayya Dikshita with Hindi Bhashya (उद्गम)
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वक्षःस्थलाचार्य भी दूसरा * नाम था । ये अपने समयके प्रौढ़ विद्वान् और दानी थे । उन्होंने बड़े-बड़े अनेक यज्ञ किये थे ।
अप्पय्यदीक्षितके पिताका नाम 'रङ्गराजाध्वरी' था । ये भी अनेक शास्त्रोंमें अप्रतिम पण्डित थे । अप्पय्यदीक्षितने इन्हींसे सब शास्त्र पढ़े थे, इस विषयका स्वयं दीक्षितजीने ही अनेक स्थानोंमें स्पष्टीकरण किया है † ।
अनेक प्रमाणोंसे दीक्षितजीका नाम 'अप्प' दीक्षित ही मालूम होता है, परन्तु आन्ध्र, कर्णाटक आदि देशोंकी भाषासरणिसे इनके 'अप्पय या अप्पय्य' ऐसे भिन्न नाम भी व्यवहारमें प्रचलित हैं । ये विजयनगरके अधीश्वर चिन्न बोम्म, नरसिंहदेव और वेंकटपतिरावके समकालिक थे, इसमें ‡ अनेक प्रमाण मिलते हैं । सिद्धान्तकौमुदीके विख्यात रचयिता भट्टोजीदीक्षितने भी सिद्धान्त-कौमुदीकी रचनाके बाद दक्षिणमें जाकर अप्पय दीक्षितजीसे पढ़ा था, उसके बाद उन्होंने तत्त्वकौस्तुभनामक ग्रन्थ लिखा था, जिसमें अपने गुरु अप्पयदीक्षितको ही प्रणाम किया है ।
अप्पयदीक्षितने अपने जीवनकालमें सौसे अधिक ग्रन्थ लिखे थे, ऐसा प्रमाण मिलता है, × क्योंकि उनके नामके आगे 'चतुरधिकशतप्रबन्धनिर्वाहका-
* यहाँपर चित्रमीमांसाका कुछ अंश प्रमाणरूपसे उद्धृत करते हैं—यथास्मत्कुलकूटस्थ-वक्षस्थलाचार्यविरचितवरदराजवसन्तोत्सवे—
'काञ्चित् काञ्चनगौराङ्गीं वीक्ष्य साक्षादिव श्रियम् ।
वरदः संशयापन्नो वक्षःस्थलमवेक्षते ॥'
† इसी ग्रन्थके 'तातचरणव्याख्यावचःख्यापितान्' 'विद्वद्गुरोर्विदितविश्वजिदध्वरस्य' इत्यादि पद्य इसमें प्रमाण हैं ।
‡ इस विषयमें ये प्रमाण मिलते हैं—
हेमाभिषेकसमये परितो निषण्णसौवर्णसंहतिमिषाच्चिन्नबोम्मभूपः ।
अप्पय्यदीक्षितमणेरनवाद्यविद्याकल्पद्रुमस्य कुरुते कनकालवालम् ॥१॥
द्विर्भावः पुष्पकेतोर्विधुघटितदृशां पौनरुक्त्यं विकल्पश्चिन्तारत्नस्य वीप्सा
तपनतनुभवो वासवस्य द्विरुक्तिः । द्वैतं देवस्य दैत्याधिपमथनकलाकेलि-
कारस्य कुर्वन्नानन्दं कोविदानां जगति विजयते श्रीनृसिंहः क्षितीन्द्रः ॥२॥
अमुं कुवलयानन्दमकरोदप्पदीक्षितः ।
नियोगतो व्यङ्कटपतेर्निरुपाधिकृपानिधेः ॥३॥
ये तीनों पद्य क्रमशः समरपुङ्गवदीक्षितके यात्राप्रबन्धमें, अप्पयदीक्षितविरचित चित्रमीमांसामें और कुवलयानन्दमें मिलते हैं ।
× यद्यपि अप्पय्यदीक्षितके सभी ग्रन्थोंके नाम ज्ञात नहीं हो सके हैं। गुरुपरम्परा एवं अन्यान्य ग्रन्थोंसे जितने नाम हमें उपलब्ध हो सके हैं, उनका निम्न प्रकारसे उल्लेख किया है—