सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)
Siddhanta Lesha Sangraha Hindi
श्रीमदप्पय्य दीक्षित द्वारा
स्रोत: Siddhanta Lesha Sangraha of Appayya Dikshita with Hindi Bhashya (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंमुक्तिके स्वरूपका विचार ] भाषानुवादसहित ५५९
श्रीरङ्गराजमखिनः श्रितचन्द्रमौले-
रस्त्यप्पदीक्षित इति प्रथितस्तनूजः ॥१॥
तन्त्राण्यधीत्य सकलानि सदाऽव्यदात-
व्याख्यानकौशलकलाविशदीकृतानि ।
आम्नायमूलमनुरुध्य च सम्प्रदायम्
सिद्धान्तभेदलवसङ्ग्रहमित्यकार्षीत् ॥२॥
सिद्धान्तरीतिषु मया भ्रमदूषितेन
स्यादन्यथाऽपि लिखितं यदि किञ्चिदस्य
संशोधने सहृदयाः सदया भवन्तु
सत्सम्प्रदायपरिशीलननिर्विशङ्काः ॥३॥
॥ इति पदवाक्यप्रमाणपारावारपारीणसर्वतन्त्रस्वतन्त्रश्रीमदप्पदीक्षितविरचिते
शास्त्रसिद्धान्तलेशसङ्ग्रहे चतुर्थः परिच्छेदः ॥
राजाध्वरीके पुत्र प्रसिद्ध विद्वान् अप्पदीक्षितने व्याख्यानकी कुशलकलाओंसे विस्तारित अनेक शास्त्रोंका अध्ययन कर और सदा वेदानुसारी सम्प्रदायका अनुसरण करके अद्वैतवेदान्तसिद्धान्तके पृथक्-पृथक् स्वरूपोंका संक्षेपसे संग्रह किया है ॥ १–२ ॥
यदि भ्रमवश सिद्धान्तोंकी रीतियोंमें मेरे द्वारा कुछ हेर-फेर हो गया हो, तो परिशुद्धसम्प्रदायके परिशीलनसे सन्देहरहित सहृदय पुरुष उसको शोधने की दया करें ॥ ३ ॥
श्रीसिद्धान्तलेशके वेदान्ताचार्यश्रीपं०मूलशङ्करव्यास-विरचित भाषानुवादमें चतुर्थ परिच्छेदका भाषानुवाद समाप्त॥