भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished1,406 पृष्ठ

पृष्ठ 272, कुल 1406 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 272
  • माहेश्वरखण्ड-अरुणाचल-माहात्म्य * २४३

था। 'प्रभास' क्षेत्रका परिचय भी तुम्हें दिया गया है, जहाँ भगवान् 'चन्द्रार्धशेखर' ने श्रीकृष्ण और बलभद्रसे पूजित होकर अक्षय फल प्रदान किया है। 'वेदारण्य' तीर्थको जानते हो, जहाँ प्रजापति दक्षने मोक्षके लिये भगवान् शंकरकी प्रार्थना की थी। 'हेमकूट' का नाम तुमने सुना होगा, जो भगवान् 'त्रिलोचन' का स्थान है, जहाँ तपस्या करनेवाले पुरुषोंका पुनर्जन्म नहीं होता। 'वेणुवन' नामक क्षेत्र सब पापोंका नाश करनेवाला है, जहाँ वंशलताके गर्भसे मुक्तामणिमय भगवान् शिव प्रकट हुए। अन्धकासुरके शत्रु भगवान् शिवका 'जालन्धर' नामक स्थान तुमने सुना होगा, जहाँ तपस्या करके जलन्धरने शिवगणोंका आधिपत्य प्राप्त किया है। 'ज्वालामुख' नामक स्थानको तो तुम जानते ही हो, जहाँ ज्वालामुखी देवीने भगवान् 'कालरुद्र' का पूजन किया है। 'भद्रपट' नामसे प्रसिद्ध एक क्षेत्र है, जिसे तुमने भी सुना होगा, जहाँ भक्तोंके सम्पत्तिके लिये भगवान् त्रिलोचनका पूजन किया है। 'गन्धमादन' क्षेत्र तुम्हारे सुननेमें आया होगा, जहाँ भगवान् मृत्युंजयकी पूजा करके मनुष्य निश्चय ही सुख प्राप्त करता है। मैंने शिवजीके 'गो-पर्वत' नामक स्थानका भी परिचय दिया है, जहाँ उपासना करके पाणिनि वैयाकरणोंमें अग्रगण्य हो गये। 'वीरकोष्ठ' नामक क्षेत्रको तो तुम्हें स्मरण है न, जहाँ तपस्या करके महर्षि वाल्मीकिने कवियोंमें प्रधानता प्राप्त कर ली। 'महातीर्थ' को तो तुम जानते ही होगे, जहाँ भगवान् शंकरने ब्रह्मा आदि देवताओंको पढ़ाया है। 'मयूरपुर' (मायावरम्) नामक माहेश्वर तीर्थ है, जहाँ तपस्या करके इन्द्रने वज्र प्राप्त किया। वेगवती नदीके तटपर 'श्रीसुन्दर' नामक क्षेत्र है, जहाँ कलियुगमें भी देवाधिदेव महादेवजी शोभा पाते हैं। भगवान् शंकरके 'कुम्भकोण' नामक स्थानको तुम जानते हो, जहाँ माघमासमें साक्षात् गंगा भी अपने पापकी शान्तिके लिये निवास करती हैं। गोदावरी नदीके तटपर 'त्र्यम्बक' नामक स्थान है, जहाँ कार्तिकेयजीने तारकासुरको मारनेवाली शक्ति प्राप्त की है। श्रीपाटलमें 'व्याघ्रपुर' नामक स्थान है, जहाँ त्रिशंकु मुनिने जाति-शुद्धिके लिये 'गंगाधर' शिवका पूजन किया था। 'कदम्बपुरी' नामक क्षेत्र तो तुम्हें याद ही होगा, जहाँ महादेवजीने तुम्हारे ही लिये त्रिशूलसे कालपर भी आघात किया था। 'अविनाश' क्षेत्रमें भगवान् शिव पार्वतीदेवीके साथ सदा निवास करते हैं। 'रक्तकानन' नामसे प्रसिद्ध जो क्षेत्र है, उसमें भगवान् शिवने मित्र और वरुण देवताको वरदान दिया था। पातालमें 'हाटकेश्वर' क्षेत्र है, जहाँ विरोचनकुमार बलि अपने अभिलषित पदकी प्राप्तिके लिये महादेवजीकी पूजा करते हैं। भगवान्‌के प्रिय निवास 'कैलास' को तो तुम जानते ही हो, जहाँ यक्षराज कुबेर भक्तिभावसे भगवान् त्रिलोचनकी पूजा करते हैं। भगवान् शिवके ये सभी स्थान तुम्हें बतलाये हैं, तुमने भी इनको ध्यानसे सुना ही होगा। अब और क्या सुनना चाहते हो?

$\sim\sim\circ\sim\sim$