भारतकोश
सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi

श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

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७८ | सौन्दर्य लहरी


है । भगवती का तीसरा नेत्र जो भ्रुकुटि के ऊपर स्थित है, वह भी अग्नेय है, जिसके एक कटाक्ष से संसार रूपी भवसागर के भय से मुक्ति मिलती है । इसलिये ब्रम्हाजी ने मधु कैटभ से भयभीत होकर इस ही बीज द्वारा भगवती की आराधना की थी । कामनाओं की सिद्धि के लिए काम बीज का प्रयोग किया जाता है । जिसके गर्भ में आद्योपान्त सारा विश्व है । (देखें श्लोक १९.)

भगवती के दोनों चरण सर्वशक्तिसामर्थ्य युक्त हैं, उनका प्रतीक सौः बीज समझा जाना चाहिये । 'स' अक्षर शक्ति वाचक माना जाता है, दो सकारों के लिये द्विवचनान्त 'सौ' पद दोनों चरणों का संकेत करता है, विसर्ग भी शक्ति का ही द्योतक है । इस प्रकार सौः बीज से भगवती के दोनों चरणों की सर्व शक्तिमत्ता प्रकट होती है । और तीनों बीजों से बाला का सब भयों से मुक्ति और मन वांछित कामनाओं की सिद्धिदे ने वाला मंत्र सिद्ध होता है । ऐसे ही नवार्ण मंत्र को भी जानना चाहिये ।

काम देव सब प्रकार के मोहों का राजा है, जो तपस्वी ज्ञानियों के चित्त पर भी प्रहार किये बिना नहीं रहता । मुमुक्षुओं को उससे अपनी रक्षा करने के लिये, सब भयों से त्राण करने वाले भगवती के चरणों की ही शरण में जाना चाहिये, दूसरा कोई मार्ग बचने का नहीं है । यह बात आगे के तीन श्लोकों द्वारा कही गई है ।

[ ५ ]

हरिस्त्वामाराध्य प्रणतजनसौभाग्यजननीं
पुरा नारी भूत्वा पुररिपुमपि क्षोभमनयत् ।