सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)
Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi
श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)
पृष्ठ 13, कुल 415 में से
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श्री १०८ स्वामीजी विष्णुतीर्थ महाराज ने श्री भगवत्पाद शंकराचार्य की रची हुई सौन्दर्य-लहरी का हिन्दी भाषा में विद्वत्ता-पूर्ण अनुवाद कर के यह पुस्तक प्रसिद्ध की है । यह उनका अनुग्रह है ।
श्री स्वामीजी कतिपय महान पुरुषों में से एक संत महात्मा हैं । आप की विद्वत्ता और योगिक तपोबल प्रासादिक है ।
सौन्दर्य लहरी में तत्वार्थ योगार्थ और मंत्रार्थ गूढ रीति से और काव्यालंकारों से छुपा हुवा है । पाठक महाशयों को उसका प्रतितार्थ यथायोग्य समझने में सहायता हो इस हेतु से श्री स्वामीजी ने अपने विवरण की पुष्टी में वेदोपनिषद् शास्त्र के आधार स्थान विशेष बार-बार उधृत किये हैं । वैसे ही नाडीयों एवं श्री चक्र के नकशे भी देने का प्रयत्न किया है । जिससे पुस्तक पढ़ने वाले व योग साधन व उपासना करने वाले भक्तजनों को विस्तृत माहिती द्वारा सन्देह कटकर उनके मन को आनन्द लहरीयों की प्राप्ती हो । यह पुस्तक आदरणीय और संग्रहणीय है । इति शिवम्
| देवास जूनियर<br>मध्यभारत<br>ता. २५-३-४९<br>फा व. ११ संवत २००५ | विनायकराव बापूजी<br>वैशंपायन<br>रिटायर्ड स्टेट कौन्सिलर. |
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