सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)
Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi
श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)
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वह अतीव सराहनीय है इस शिव ताण्डव ने सचमुच सोने में सुगंध वाली कहावत चरितार्थ की है यह परम समाधान की बात है ।
अन्त में सर्वोपकारक ग्रंथकार का अभिनन्दन करके इस अल्प निवेदन का विराम करते हैं ! इतिशम्
सर्वेषां विधेयः
शंकरानन्द भारती यति
मु. मोरटक्का रेवातीर
पूर्वाश्रमीः—महामहोपाध्याय—वेदान्तवागीश
श्री० श्रीधरशास्त्री पाठक
डेक्कन कॉलेज पूना
नोटः—श्री स्वामीजी के निवास स्थान मुकाम मोरटक्का के निकट नर्मदातट पर खेडीघाटस्थ श्री राजराजेश्वरी मन्दिर में प्रतिष्ठित श्रीमच्छंकर भगवत्पाद की प्रतिमा का फोटो इस ग्रंथ के प्रथम पृष्ठ पर दिया जाता है । लेखक उसके लिये और श्री स्वामीजी के इन भावपूर्ण उद्गारों के लिये श्री भालचंद्र शास्त्रीजी का बहुत आभारी है ।