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सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi

श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

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सौन्दर्य लहरी १४७

और तीनों को सुषुम्ना द्वार में प्रवेश कर के मृत्यु को जीत लिया, मानों मृत्यु को षट् चक्र वेध द्वारा पांचों तत्वों के वेध में लीन कर दिया, फिर पांचों तत्वों को तीनों ब्रह्म, विष्णु और रुद्र ग्रंथियों के वेध द्वारा तीनों गुणों में लीन कर दिया और तीनों गुणों को उनके एक कारणभूत महत् तत्व में लीन कर दिया, इस प्रकार सब को आत्मा में और आत्मा को परमात्मा अक्षर ब्रह्म में लीन कर दिया। तत्पश्चात् ‘अहं ब्रह्मास्मि’ के ज्ञान में निदिध्यासन द्वारा स्थिति रखते हुए सायुज्य मोक्ष की प्राप्ति की।

तत्वों और चक्रों के अधि देवों की कलाओं के नाम

मणिपूर में अग्नि की दस कलाएं सारे शरीर के व्यापार को धारण किये हुए हैं। अग्नि का स्थान योनि स्थान में बताया जा चुका है उसकी दस कलाएं मणिपूर में उठा करती हैं। मणिपूर के दस दलों का प्रत्येक दल इन कलाओं का एक २ दल है। अग्नि की कलाओं के नाम ये हैं:—

धूम्रार्चि, ऊष्मा, ज्वलिनी, ज्वालिनी, विस्फुलिंगी, सुश्रिया, सुरूपा, कपिला, हव्यवाहिनी और कव्यवाहिनी।

अनाहत् चक्र के १२ दल सूर्य की १२ कलायें हैं, उनके नाम ये हैं—तपिनी, तापिनी, धूम्रा, मरीची, ज्वालिनी, रुची, सुषुम्ना, भोगदा, विश्वा, बोधिनी, धारिणी और क्षमा।

विशुद्ध चक्र के १६ दल चन्द्रमा की १६ कलायें हैं, उनके नाम ये हैं—अमृता, मानदा, पूषा, तुष्टी, पुष्टी, रती, धृति,