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सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi

श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

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२४४ | सौंदर्य लहरी


जैसे स्त्रियां मांग में सिंदुर भरती हैं उसी प्रकार मानो देवी के मुख कमल की अरुणिमा केशों की मांग में सिंदूर सी चमकती हुई मूर्धा पर बह रही है । मानों उदय कालीन सूर्य की लाल किरणें रात्रि के अन्धकार को चीरना चाहती हैं । परन्तु अन्धकार रूपी दुश्मनों ने उसको कैद कर लिया है ।

स्रोत का प्रवाह ऊपर से निम्न तल पर हुआ करता है, परन्तु भगवती की शोभा की कान्ति उर्ध्व गामिनी है । उसे योगियों में ज्ञान के सूर्य के उदय होने से पूर्व प्रकट होने वाले प्रातिभ ज्ञान के सदृश समझना चाहिये ।

अलकों का ध्यान:—

( ४५ )

अरालैः स्वाभाव्यादलिकलभश्रीभिरलकैः
परीतं ते वक्त्रं परिहसति पंकेरुह रुचिम् ।
दरस्मेरे यस्मिन्दशन रुचि किंजल्करुचिरे
सुगन्धौ माद्यन्ति स्मरदहन चक्षुर्मधुलिहः ॥

कठिन शब्दों का अर्थ:— अराल=घुंघराले; कलभ=बच्चा; स्मेर=मुस्कराहट; दर=किंचित, थोडी; किंजल्क=स्फटिक; मधुलिह=भौँरा; अलक=जुल्फ ।

**अर्थ:—**स्वाभाविक घुंघराली जवान भौंरा की कांतियुक्त अलकावलि से घिरा हुआ तेरा मुख, कमलों की शोभा का

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