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सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi

श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

पृष्ठ 312, कुल 415 में से

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२६२ सौंदर्य लहरी


मुख रथ है, उसके चार पहिये कानों में लटकते हुए दो कर्ण फूल हैं, और दो उनके कपोलों पर प्रतिबिंब हैं । शंकर का रथ पृथ्वी है, जिसके सूर्य और चन्द्रमा दो पहिये हैं, जिसपर चढकर शंकर ने त्रिपुरों को हराया था । परन्तु यहां देवी के मुख रूपी रथ का आश्रय लेने के कारण कामदेव शंकर के समक्ष युद्ध करने का साहस करता है ।

[ ६० ]

सरस्वत्याः सूक्तीरमृतलहरीकौशलहरीः
पिबंत्याः शर्वाणि श्रवणचुलुकाभ्यामविरलम् ।
चमत्कारश्लाघाचलितशिरसः कुण्डलगणो
झणत्कारैस्तारैः प्रतिवचनमाचष्ट इव ते ॥

कठिन शब्दों के अर्थ:- तार=ॐ कार. प्रति वचन=स्वीकृति सूचक हुंकार कहना ।

अर्थ:- हे शर्वाणि ! सरस्वती की सुन्दर युक्ति को जो अमृत की लहरी के कौशल को हरती है श्रवण रूपी चुल्लुओं द्वारा अविरल पान करते समय तेरे कुंडलगण चमत्कार पूर्ण उक्तियों की श्लाघा सूचक सिर हिलाते समय, झण २ बजकर मानों ॐकार का उच्चारण सदृश हुंकार द्वारा उत्तर दे रहे हैं ।

प्राचीन काल में अनुज्ञा सूचक शब्द के स्थान पर ॐ कहते थे, जैसे आजकल हां अथवा हुं कहकर अनुज्ञा प्रकट की जाती है । देखें छान्दोग्योपनिषत् ( १. १. ८)

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