भारतकोश
सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi

श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

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सौंदर्य लहरी २८९


उरुयुग्मका ध्यानः—

( ८२ )

करीन्द्राणां शुण्डान् कनककदलीकाण्डपटली-
मुभाभ्यामुरुभ्यामुभयमपि निर्जित्य भवती ।
सुवृत्ताभ्यां पत्युः प्रणतिकठिनाभ्यां गिरिसुते
विजिग्ये जानुभ्यां विबुधकरिकुम्भद्वयमपि ॥

**कठिन शब्दः—**पटली=पटं विस्तारं त्याति आददाति,

**अर्थः—**हे गिरि सुते ! आप अपने दोनों उरुओं मे गजेन्द्रों के सूंडों को और सुवर्ण के बने हुए केले के लंबे स्तंभों को जीतकर, पति को प्रणाम करते २ कठिन हो गये हैं ऐसे दोनों सुन्दरगोल घुटनो से बुद्धिमान हाथीके दोनों (मस्तक के) कुंभों को भी पराजित कर रही हैं !


जंघाओं का ध्यानः—

( ८३ )

पराजेतुं रुद्रं द्विगुणशरगर्भौ गिरिसुते
निषङ्गौ जङ्घे ते विषमविशिखो बाढमकृत ।
यदग्रे दृश्यन्ते दशशरफलाः पादयुगली-
नखाग्रच्छद्मानः सुरमुकुटशाणैकनिशिताः ॥

**कठिन शब्दः—**निषङ्ग=तरकस, विशिखः=शर, बाण; विषम विशिखः=कामदेव