भारतकोश
सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi

श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

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सौंदर्य लहरी ३०१


चरणों की गति का ध्यान:-

( ९१ )

पदन्यासक्रीडापरिचयमिवाऽब्धुमनम- श्रन्तस्ते (स्खलन्तस्ते) खेलं भवनकलहंसा न जहति । अतस्तेषां (स्वविक्षेपे) शिक्षां सुभगमणिमञ्जीररणित- च्छलादाचक्षाणं चरणकमलं चारुचरिते ॥

कठिन शब्दः—आचक्षाणः=बातें करता हुआ

अर्थः— हे चारु चरिते ! ऐसा प्रतीत होता है कि तेरे भवन के राजहंस चलते समय तेरे पदन्यास क्रीडा (चाल) का परिचय प्राप्त करने को तेरे खेल का त्याग नहीं करते । (अर्थात तेरे पीछे २ तेरी तरह कदम उठाकर चलते हैं, और वे इस खेल का त्याग नहीं करते, और तेरे चलते समय चरण कमलों में लगी मणियों युक्त नूपुरों की झङ्कार का शब्द मानो उनको चलने की शिक्षा का उपदेश कर रहा है ।

स्त्रियों की चाल की हंसगति से उपमा दी जाया करती है, परन्तु भगवती की चाल से हंस स्वयं चलने की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं । दूसरा भाव यह भी है कि परमहंस महापुरुषों की उन्मत्त गतिविधि में शक्ति की क्रीडा युक्त मस्तीभरी चाल का आभास रहता है । जीवनमुक्त परम हंस ही भगवती के भवन के राजहंस हैं ।