भारतकोश
सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi

श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

पृष्ठ 361, कुल 415 में से

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सौन्दर्य लहरी ३११

रंग है और चमकती हुई कलायें कपूर सदृश हैं। दोनों को जल में पीसकर तेरे आभोग के लिये डिब्बे में भरकर रखा हुआ है, जो प्रतिरात्रि खर्च होता रहता है और ब्रह्मा उसे फिर दिन में बार २ भरता रहता है।

नीचे चरणों के पास सूर्यमण्डल, और ऊपर विशुद्ध चक्र में १६ कलायुक्त चन्द्रमण्डल दोनों भगवती के श्रृङ्गार के साधन हैं। सूर्यमण्डल यदि मुकुर है तो चन्द्रमण्डल श्रृङ्गार का डिब्बा है। कृष्णपक्ष भगवती की रात्रि है और शुक्लपक्ष दिवस। शुक्ल और कृष्ण पक्षों को देवताओं का दिनरात कहते हैं।


भगवती की सपर्या की असुलभता

( ९६ )

पुरारातेरन्तःपुरमसि ततस्त्वच्चरणयोः
सपर्यामर्यादा तरलकरणानामसुलभा ।
तथाह्येते नीताः शतमखमुखाः सिद्धिमत्तुलां
तव द्वारोपान्तस्थितिभिरणिमाऽऽद्याभिरमराः ॥

कठिन शब्दः— शतमख=इन्द्र

अर्थः— तू त्रिपुरारि के अन्तःपुर की रानी है इसलिये तेरे चरणों की सपर्या पूजा की मर्यादा चंचल इंद्रियों वाले मनुष्यों को सुलभ नहीं, और इन्द्र की प्रमुखता में रहने

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