सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)
Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi
श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)
पृष्ठ 38, कुल 415 में से
संदर्भ में पढ़ेंश्री चक्र निर्माण की विधि पृ. १०७, श्लो. १२ पृ. १११, भगवती का सौन्दर्य कल्पनातीत है पृ. ११०, श्लो १३ पृ. ११३. काय सम्पत् सिद्धि, श्लो. १४ पृ. ११५, तत्त्वों की किरणें ११५, किरणों का तत्त्वों से सम्बन्ध ११७, किरणों का वर्णमाला से सम्बन्ध ११८, किरणों की अधिष्ठातृ शक्तियां १२१, श्लो. १५ पृ. १२५, वाक् सिद्धि, श्लो. १६ पृ. १२७, श्लो. १७ पृ. १२९, श्लो. १८ पृ. १३०, मधुमती भूमिका की सिद्धि श्लो १९ पृ. १३२, काम कला का ध्यान, श्लो. २० शक्तिपात करने की सिद्धि, पृ. १३५, श्लो. २१ पृ. १३७, चक्रों और सहस्रार का सविस्तार वर्णन, पृ. १३९, चन्द्र सूर्य पृ. १४४ तत्त्वों और चक्रों के अधिदेवों की कलाओं के नाम १४७ आक्त के ऊपर ९ स्तर १४९, श्लो. २२ पृ. १५३, अहं ब्रह्मास्मि ज्ञान का उदय १५३, श्लो. २३ अर्ध-नारीश्वर सदाख्यतत्त्व का ध्यान, पृ. १५६, श्लो. २४ ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र, ईश्वर और सदाशिव, पृ. १५७, श्लो. २५, पृ १५९, श्लो. २६ पृ. १६०, तीन प्रकार का पूजन १६१, श्लो. २७ पृ. १६२, श्लो. २८ पृ. १६४, श्लो २९ पृ. १६५, कैटभ भिद् १६६, श्लो. ३० पृ. ब्रह्मभाव १६८, श्लो. ३१ पृ. ६४ तंत्रों से भगवती का तंत्र स्वतंत्र है, १६०, श्लो ३२, ३३, १७५, हादिकादि विद्याओं के रूप पंचदशी और उसके आधार पर अन्य विद्यायें १८०, माला का विधान १८०, षोडशी विज्ञान १८१ नाद, बिन्दु और कला १८७, श्लो. ३४, शिव शक्ति का अंगी अंगवत् सम्बन्ध, पृ. १९०, श्लो. ३५, सारा विश्व शक्ति का परिभास है, १९३, श्लो. ३६ आज्ञा चक्र, १९६, श्लो. ३७ विशुद्ध चक्र, पृ. १९९.