भारतकोश
सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi

श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

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महामाया महालक्ष्मीर्महांद्री सरस्वती । आधार शक्ति ख्यक्ता यया विश्वंप्रवर्तते ॥ ( २-११,१२)

दूसरा क्रम जो प्रवृत्ति मार्ग वालों को इष्ट हैं, उसके अनुसार परा शक्ति को माया के ऊपर का स्तर मानकर 'ऐं' बीज ग्रहण किया जाता है. सदाख्य स्पन्द में माया की स्थिति बीज रूप से मानने से वहां ह्रीँ बीज माना जाता हैं; तपः पुंज ईश्वर को श्रीँ का स्थान और कामना युक्त ईश्वर को काम बीज क्लीँ का स्थान माना जाता है । सत् और असत् दोनों शक्ति सकार के रूप होने से सौः बीज के अन्तर्गत समाविष्ट हैं । और इस प्रकार दो मंत्रों का निर्माण हो जाता है ।


परिशिष्ट (२)

अथ ऋग्वेदीया त्रिपुरोपनिषत् ।

त्रिपुरोपनिषद्वेद्यंपारमैश्वर्यवैभवम् ।
अखण्डानन्द साम्राज्यं रामचन्द्रपदं भजे ॥

ॐ वाङ्मे मनसि प्रतिष्ठिता मनो मे वाचि प्रतिष्ठित-
माविरावीर्म एधि वेदस्य म आणीस्थः श्रुतं मे माप्रहासीरनेनाधी-
तेनाहोरात्रान् संदधामि । ऋतं वदिष्यामि, सत्यं वदिष्यामि ।
तन्मामवतु, तद्वक्तारमवतु, अवतुमाम्, अवतु वक्तारमवतु वक्तारम् ।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ।