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सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi

श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

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परिशिष्ट ( ३ )

अथ अथर्ववेदीया भावनोपनिषत् का हिन्दी अनुवाद !

स्त्राविक्षापदतत्कार्य श्रीचक्रोपरि भासुरम् ।
विन्दुरूपंशिवकारं रामचन्द्रपदं भजे ॥

ॐ भद्रंकर्णेभिः शृणुयामदेवा भद्र पश्येमाक्षभिर्यजत्राः । स्थिरैरङ्गै स्तुष्टुवांसस्तनूभिर्व्यशेम देवहितं यदायुः । स्वस्तिन इन्द्रो वृद्धश्रवाः, स्वस्तिनः पूषाविश्ववेदाः, स्वस्ति नस्ताक्षर्यो अरिष्टनेमिः, स्वस्तिनो वृहस्पतिर्दधातु । ॐ शान्तिः ३ ॥

हरिः ॐ ॥ आत्माका चारों ओर सकल ब्रह्माण्डमण्डल को घेरेहुए, अखण्ड मण्डलाकार स्वयं प्रकाशमान ध्यान करना चाहिये । ॐ श्रीगुरु सबकी कारणभूता शक्ति है । उससे ९ रंध्र (छिद्र) वाला देह बनता है, वह ही ९ शक्ति स्वरूप श्रीचक्र है । (जैसे देह में २ नेत्र, २ कान, २ नाक के छिद्र, १ मुख, १ पायु और १ उपस्थ ये ९ छिद्र हैं वैसे ही श्रीचक्र में ४ श्रीकंठ और ५ शिव युवतियों वाले ९ प्रकृति स्वरूप त्रिकोण हैं), (सौ. ल. श्लोक ११) । वाराही शक्ति पितृ रूपा है । (सौ. ल. श्लोक ३) और कुण्डलिनी शक्ति मातृ रूपा है (सौ. ल. श्लोक ९), पुरुषार्थ सागर हैं, देह नवरत्नद्वीप (सौ. ल. श्लोक ८), आधार नवक मुद्रा शक्तियां हैं (त्रैलोक्य

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