सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)
Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi
श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१० सौन्दर्य लहरी
अनात्म तत्वों में आत्म भावना के न रहने पर उन तत्वों की शुद्धि कहलाती है ।
चौथे भ्रम की निवृत्ति जगत को सत् शक्ति का परिणाम जान कर ब्रह्म के विकार रहित सिद्ध होने पर होती है; और पांचवे भ्रम की निवृत्ति शक्ति में ब्रह्म दृष्टि होने पर होती है ।
अनात्म तत्वों में से आत्माध्यास की निवृत्ति होना अर्थात पंचकोशों के विभिन्न स्तरों पर से आत्म-भावना रूपी तादात्म्यता को नष्ट करना ही तत्व शुद्धि कहलाता है । तत्व शुद्धि
जैसा कि 'तैत्तिरीयोपनिषत्' के आठवे अनुवाक में कहा है कि इस लोक से प्रयाण करते समय अपने आत्म स्वरूप को जैसा बताया गया है, वैसा जानने वाला मनुष्य इस आत्मा को अन्नमय कोष से निकालता है, इस आत्मा को प्राणमय कोष में से निकालता है, इस आत्मा को मनोमय कोष से निकालता है, इस आत्मा को विज्ञानमय कोष से निकालता है, इस आत्मा को आनन्दमय कोष से निकालता है । आनन्द ब्रह्म को जानने वाला, जहां से मन सहित वाणी बिना उसे प्राप्त किये लौट आती है, किसी से भी भय नहीं खाता । अर्थात वह निर्भय ब्रह्म पद को प्राप्त हो जाता है ।
अन्नमय कोष पांच महाभूतों से बना है, इसलिये उससे निकालने के लिये क्रमशः पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश के ५ स्तरों से आत्मा को हटाना पड़ेगा । उक्त तत्व भी अपने अपने स्तर पर अन्य तत्वों के सम्मिश्रण के परिणाम हैं; पृथ्वी में ५६, जल में ५२, अग्नि में ६२, वायु में ५४, और आकाश में ७२ किरणें होती हैं, जिनका सम्बन्ध तत्वों और