स्पन्दनिर्णय एवं स्पन्दकारिका (आचार्य क्षेमराज - काश्मीर शैव स्पन्द-शास्त्र सान्वय सटीक)
Spanda Nirnaya of Acharya Kshemaraja with Hindi Commentary
आचार्य वसुगुप्त / क्षेमराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[१] स्पन्दकारिका का अध्यायीकरण १) आचार्य क्षेमराज के अनुसार 'स्पन्दनिर्णय' में— (क) प्रथम निष्यन्द : २५ कारिकायें : स्वरूपस्पन्द (ख) द्वितीय निष्यन्द : ७ कारिकायें : सहजविद्योदयस्पन्द (ग) तृतीय निष्यन्द : १९ कारिकायें : विभूतिस्पन्द (घ) चतुर्थ निष्यन्द : १ कारिका : अगाध... गुरुभारतीम् (१का०) २) आचार्य रामकण्ठ के अनुसार 'स्पन्दकारिकाविवृति' में— (क) प्रथम निष्यन्द : १६ कारिकायें : व्यतिरेकोपपत्तिनिर्देशनिष्यन्द (ख) द्वितीय निष्यन्द : ११ कारिकायें : व्यतिरिक्तस्वभावोपलब्धिनिष्यन्द (ग) तृतीय निष्यन्द : ३ कारिकायें : विश्वस्वभावशक्त्युपपत्तिनिष्यन्द (घ) चतुर्थ निष्यन्द : २१ कारिकायें : अभेदोपलब्धिनिष्यन्द (ङ) अन्त में : १ कारिका : अगाध ... गुरुभारतीम् ॥ ३) आचार्य उत्पलदेव के अनुसार 'स्पन्दप्रदीपिका' में— कारिकाओं का वर्गीकरण करके कारिकाओं को प्रस्तुत नहीं किया गया । ४) आचार्य वसुगुप्त के अनुसार 'शिवसूत्र' में— (क) प्रथम अध्याय : 'शांभवोपाय' : (साधना-पद्धति) ॥ (ख) द्वितीय अध्याय : 'शाक्तोपाय' : (साधना-पद्धति) ॥ (ग) तृतीय अध्याय : 'आणवोपाय' : (साधना-पद्धति) ॥ ५) आचार्य भट्टकल्लट के अनुसार 'स्पन्दकारिकावृत्ति' में— (क) प्रथम निष्यन्द : 'स्वरूपस्पन्द' : १-२५ कारिकायें : २५ का० (ख) द्वितीय निष्यन्द : 'सहजविद्योदय' : २६-३२ कारिकायें : ६ का० (ग) तृतीय निष्यन्द : 'विभूतिस्पन्द' : ३३-५२ कारिकायें : २० का० (प्रस्तुत ग्रन्थ में आचार्य भट्टकल्लट की 'स्पन्दकारिकावृत्ति' के द्वारा प्रस्तुत अध्यायीकरण को ही स्वीकार किया गया है ।)