भारतकोश
स्पन्दनिर्णय एवं स्पन्दकारिका (आचार्य क्षेमराज - काश्मीर शैव स्पन्द-शास्त्र सान्वय सटीक)

स्पन्दनिर्णय एवं स्पन्दकारिका (आचार्य क्षेमराज - काश्मीर शैव स्पन्द-शास्त्र सान्वय सटीक)

Spanda Nirnaya of Acharya Kshemaraja with Hindi Commentary

आचार्य वसुगुप्त / क्षेमराज द्वारा

DevanagariHindipublished519 पृष्ठ

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पृष्ठ 324

प्रथमः निष्यन्दः २२३ गुणस्पन्दों के अनन्त प्रवाह हैं। स्पन्दशक्ति का प्रथम बहिर्मुखी निष्पंद प्राण हैं। गुणस्पन्द = सतोगुण-रजोगुण-तमोगुण के स्पन्द ॥ अनन्त रूप में प्रवहमान अनन्त प्रकारक विकल्प-प्रत्यय ही विशेष स्पंद है। निष्यन्द = प्रवाह । अपरिपन्थी = अनाच्छादक ॥ 'स्पन्दतत्त्व' के दो भेद हैं—१. सामान्य स्पंद, २. विशेष स्पंद। प्रतिष्ठित स्पन्द एवं अप्रतिष्ठित स्पन्द भी इन्हीं के पर्याय हैं। गुणादिस्पंद ही विशेष स्पंद हैं। अब ग्रन्थकार इस तथ्य को प्रतिपादित करता है कि सुप्रबुद्ध योगी को जागृति- स्वप्न-सुषुप्ति, आदि-मध्य-अन्त आदि कोई भी अवस्था साधना-मार्ग में बाधा नहीं पहुँचा पातीं। १ गुण = सतोगुण-रजोगुण-तमोगुण। निष्यन्द-प्रवाह। ब्रह्माण्ड का बुच्छादितुच्छ पदार्थ से लेकर महनीय पदार्थ भी स्पन्द शक्ति का ही एक प्रवाह है। स्पंद की विशिष्ट अभिव्यक्तियाँ जो कि गुणों के साथ आरंभ होती हैं एवं जिनकी सत्ता व्यापक स्पंद तत्त्व पर आधृत है—ज्ञाता का विरोध कभी नहीं करतीं। २ गुण = प्रकृति के गुणत्रय। मायातत्त्वावस्थित तीन गुण। 'स्वच्छन्दतन्त्र' में कहा गया है— अधश्छादयन् मूर्ध्वं च रक्तं शुक्लं विचिन्तयेत्। मध्ये तमो विजानीयात् गुणास्त्वेते व्यवस्थिताः ॥ (२।६५) ॥ परिपन्थी = स्वस्वभावाच्छादक, विरोधी। ज्ञ = सुप्रबुद्ध। निष्यन्द = नीलसुखादि। स्पन्दों के प्रसर। स्पन्द = कलादिक्षित्यन्त तत्त्व। संश्रयात् = आश्रय ग्रहण करने से । ३ पारमेश्वरी, ज्ञान-क्रिया-माया शक्तित्रितय द्वारा सदाशिव आदि पद में स्फुरित होकर सङ्कोच के प्रकर्ष द्वारा, सतोगुण—रजोगुण एवं तमोगुण रूपी क्रीड़ाशरीर का आश्रय लेती है। 'ईश्वरप्रत्यभिज्ञा' (३।३।४) में कहा गया है— स्वांगरूपेषु भावेषु पत्युर्ज्ञानं क्रिया च या। माया तृतीयेव पशोः सत्वं रजस्तमः ॥ (३।३।४) ४ शाश्वत एवं स्पन्दात्मिका संवित् शक्ति जब बाह्य प्रसार की ओर उन्मुख होती है तब उसका सर्वप्रथम परिणामन—प्राण के रूप में ही होता है। 'तेनाहुः किल संवित् प्राक् प्राणे परिणता ॥ (तं० ६.१२)


१-४. स्पन्दनिर्णय।