भारतकोश
स्पन्दनिर्णय एवं स्पन्दकारिका (आचार्य क्षेमराज - काश्मीर शैव स्पन्द-शास्त्र सान्वय सटीक)

स्पन्दनिर्णय एवं स्पन्दकारिका (आचार्य क्षेमराज - काश्मीर शैव स्पन्द-शास्त्र सान्वय सटीक)

Spanda Nirnaya of Acharya Kshemaraja with Hindi Commentary

आचार्य वसुगुप्त / क्षेमराज द्वारा

DevanagariHindipublished519 पृष्ठ

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पृष्ठ 457

३५६ स्पन्दकारिका सारांश— 'शक्तिचक्र' शक्तियों का समूह । (शक्तियाँ = वामेश्वरी । खेचरी । दिक्चरी आदि) इन्द्रियों का समूह । मन्त्रों का चक्र । ब्राह्मी, माहेश्वरी आदि शक्तियों का समुदाय (Wheel of powers) । रामकण्ठाचार्य की व्याख्या— पशु = 'पराधीनसर्ववृत्तित्वेन अनवभासितात्मा पशुः । = वह प्रतिपादयितव्य आत्मा रूपी ईश्वर जो कि प्रत्यभिज्ञा के अभाव में 'पशु' बन जाता है । स्मृतः = संसाररूपी क्रीड़ा के अनादि होने से (जो 'पशुपति' अनादि काल से वर्तमान काल तक) 'पशु' के रूप में स्मरण किया जाता रहा है । कैसा होकर स्मरण किया जाता है? 'शब्दराशिसमुत्थस्य शक्तिवर्गस्य कलाविलुप्तविभवो भोग्यतां गतः सन्' । शक्ति = पारमेश्वरी शक्ति । वाक् के रूप में प्रसृत आदि शान्त वर्ण- समुदायात्मक शक्ति ।¹ अम्बा—ज्येष्ठा-रौद्री-वामा-आदि का शक्तिचक्र ।² 'शक्तिचक्र संधाने विश्वसंहारः । (शिवसूत्र ६) में भी 'शक्तिचक्र' शब्द का प्रयोग आया है । पशुत्व और पशु का स्वरूप— 'पशु' के निम्न लक्षण हैं— (१) शब्दराशि से समुत्थित (अकारादि सकारान्त शब्द-समूह से आविर्भूत) ब्राह्मी आदि शब्दाधिष्ठात्रियों (शाब्द शक्तियों) के वशीभूत और उनका क्रीत अनुचर । (२) अकारादिक्षकारान्त कला समूह के द्वारा 'स्वातन्त्र्यशक्ति' रूप वैभव से हीन—पति प्रमाता ही 'पशु' कहलाता है । शब्दराशि—अकारादि क्षकारान्त वर्ण समूह । ('मातृका') । शक्तिवर्ग—कादिवर्गात्मक ब्राह्मी आदि शक्तियों का समूह । ब्राह्मी आदि शक्तियों के साथ सम्बद्ध कलाओं ने (ककारादि क्षकारान्त 'शब्दराशि' ने) 'पति' के स्वातन्त्र्य शक्ति रूप वैभव को नष्ट कर दिया है और उसे उसके स्वस्वभाव से च्युत कर दिया है । भोग्यताम् = शक्ति वर्ग की अधिष्ठात्री देवियों का भोग बना हुआ होना । भोक्ता तो ब्राह्मी आदि (क आदि आठ वर्गों की अधिष्ठात्री देवियाँ) अधिष्ठात्री शक्तियाँ हैं और भोग्य हैं पशु । ये शक्तियाँ निम्नांकित हैं— विमर्शशक्ति के चार रूप = पीठेश्वरी ┌──────┬──────┬──────┬──────┬──────┬──────┬──────┐ माहेशी ब्राह्मी कौमारी वैष्णवी ऐन्द्री याम्या चामुण्डा योगेशी वर्ण समाम्नाय के अष्टवर्ग—(नव वर्ग)— ┌───┬───┬───┬───┬───┬───┬───┬───┐ अवर्ग कवर्ग चवर्ग टवर्ग तवर्ग पवर्ग यवर्ग शवर्ग क्षवर्ग शब्दराशि = वर्ण समुदाय = वर्णमाला = 'मातृका' १. स्पन्दकारिकाविवृति (रामकण्ठाचार्य) । २. शिवसूत्रविमर्शिनी (सूत्र ४) ।