भारतकोश
श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary

भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा

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अवतरणिकाः प्रथम अध्याय (प्रथम पाद) मंगलाचरण भूमिका अध्याय की अवतरणिका जिज्ञासाधिकरण (सूत्र १) अथ और अतः शब्द का अर्थ निरूपण-ब्रह्म और जिज्ञासा शब्दार्थ धर्म जिज्ञासा और ब्रह्मजिज्ञासा का पौर्वापर्य क्रम निरूपण ब्रह्म मीमांसा और कर्म मीमांसा की एक शास्त्रीयता का प्रतिपादन-अध्ययन विधि और स्वरूप निरूपण। पृ०१-८ लघु पूर्वपक्ष ब्रह्म मीमांसा के लिए कर्म मीमांसा की अनपेक्षता के समर्थनपूर्वक सापेक्षता का खण्डन। तत्त्वमसि आदि महावाक्य जनित ज्ञान से अविद्या निवृत्ति का समर्थन एवं श्रवण मनन आदि के स्वरूपों का निरू- पण। पृ०८-१३ लघु सिद्धान्त वाक्य जन्य ज्ञान की मोक्ष साधनता का खण्डन तथा शास्त्रोक्त “ज्ञान” और “वेदन” आदि शब्दों की ध्यानार्थकता का प्रतिपादन ध्यान की ध्रुवानु- स्मृति रूपता, भक्ति रूपता तथा मोक्ष साधनता का समर्थन एवं ब्रह्मजिज्ञासा में कर्म ज्ञान की आवश्य- कता का समर्थन। पृ०१३-२४ महा पूर्वपक्ष शांकर मत उत्थापनः-ब्रह्म सत्यता, जगन्मिथ्यात्व एवं मिथ्यात्व का लक्षण। अविद्या का लक्षण और स्वरूप निरूपण। अद्वैतज्ञान से अविद्या निवृत्ति का समर्थन। प्रत्यक्ष के साथ शास्त्र की विरुद्धता में ankurnagpal108@gmail.com