श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)
Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary
भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १६४ ) । व-विषय (शुक्ति) का ही आवरण कर सकता है। विवादास्पद अज्ञान, ज्ञान से निवत्र्त्य भी नहीं है, क्योंकि वह ज्ञान के विषय (ज्ञेय) का आवरण नहीं करता। जो अज्ञान, ज्ञान द्वारा निवर्त्य होता है, वह ज्ञान के विषय का आवरक होता है, जैसे शुक्ति आदि का अज्ञान। घट आदि पदार्थों में जैसे ज्ञातृता नहीं रहती, वैसे ही ब्रह्म में भी ज्ञातृता का अभाव है, इसलिये वह अज्ञान का आश्रय नहीं हो सकता। अज्ञान कभी ब्रह्म को आवृत नहीं कर सकता, क्योंकि वह ज्ञान का विषय (ज्ञेय) नहीं है। जो अज्ञान से आवृत होता है, वह निश्चित ही ज्ञान का विषय होता है जैसे कि-शुक्ति। ब्रह्मविषयक अज्ञान ज्ञान से निवर्त्य नहीं है, क्योंकि वह ज्ञान का विषय नहीं है जो अज्ञान, ज्ञान से निवर्त्य होता है, वह निश्चित ही ज्ञान का विषय होता है जैसे कि शुक्ति। विवादास्पद प्रमाणरूप ज्ञान कभी अपने प्रागभाव के अतिरिक्त, अज्ञानपूर्वक नहीं हो सकता, क्यों कि वह, आपके अभिमत अज्ञान साधक, प्रमाण ज्ञान की तरह, प्रमाण जन्य होता है। ज्ञानं न वस्तुनो विनाशकम्, शक्तिविशेषोपबृंहण विरहे सति ज्ञानत्वात् । यद्वस्तुनो विनाशकं तत् शक्ति विशेषोपबृंहितं ज्ञान- मज्ञानं च दृष्टम्, यथेश्वरयोगिप्रभृतिज्ञानं, यथा च मुद्गरादि । भावरूपमज्ञानं न ज्ञानविनाश्यम्, भावरूपत्वात् घटादिवदिति । अथोच्येत-बाधक ज्ञानेन पूर्वज्ञानोत्पन्नानां भयादीनां विनाशो दृश्यते इति । नैवम् नहि ज्ञानेन तेषां विनाशः क्षणिकत्वेन तेषां स्वयमेव विनाशात् । कारणनिवृत्या च पश्चादनुत्पत्तेः । क्षणिकत्वं च तेषां ज्ञानवदुत्पत्तिकारणसन्निधानएवोपलब्धेः अन्यथानुपलब्धेश्चाव- गम्यते । अक्षणिकत्वे च भयादीनां भयादि हेतुभूतज्ञानसन्तताव- विशेषेण सर्वेषां ज्ञानानां भयादुत्पत्ति हेतुत्वेनानेकभयोपलब्धि प्रसंगाच्च । ज्ञान स्वभावतः किसी वस्तु का विनाशक नहीं होता, क्यों कि- वह अन्यशक्ति की सहायता से रहित स्वतः सिद्ध है। जिससे वस्तु का ankurnagpal108@gmail.com