भारतकोश
श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary

भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा

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जल और दूध के दृष्टान्त से प्रकृति जगत्कारणता के किए गए समर्थन का निराकरण । २. ब्रह्म की सृष्टिकर्तृ'ता में जीव के पुण्यपापानुसार प्रकृति की कारणता का समर्थन । पुण्य पाप की शास्त्रगम्यता, परमेश्वर की दयालुता, और निग्रहानुग्रह के आधार पर प्रकृति की जगत्कारणता का खंडन । ३. धेनु भुक्त तृण आदि की दुग्धाकार परिणिति की तरह, ईश्वर प्रेरणा निरपेक्ष प्रकृति की जगदाकार परिणिति के सिद्धान्त का खंडन । ४. पंगु सहायक अंध तथा लोह सन्निहित चुम्बक मणि की तरह, पुरुष निकटस्थ प्रकृति स्फुरण सिद्धान्त का खंडन । सत्त्व, रज और तमोगुण में गुण प्रधान भाव की अनुपपत्ति । ५. प्रधान में ज्ञान शक्ति के अभाव के आधार पर तत्संबंधी अन्यान्य अनुमानों की अनुपपत्ति का प्रदर्शन । अनुमान के साहाय्य से प्रधान की स्थिति की सिद्धि होते हुए भी उसकी व्यर्थता ज्ञापन । परस्पर विरोधी सिद्धान्तों के आधार पर सांख्यमत की असमंजसता का दिग्दर्शन । ६. शांकर सम्मत निर्विशेष चिन्मात्र की असत् बंध मोक्ष भागित सिद्धान्त का खंडन । —७४३-६६ २. महद्दीर्घाधिकरण [सूत्र १०-१६] १. वैशेषिक परमाणु कारणवाद का वर्णन एवं उसकी अनुपपत्ति का प्रदर्शन । १०वें सूत्र की शांकर व्याख्या में दोष दिग्दर्शन । २. परमाणुगत प्राथमिक क्रियोत्पत्ति की असंभवता का वर्णन । समवाय संबंध का खंडन । युत सिद्धि और अयुतसिद्धि का विचार तथा समवाय स्वीकृति में अनवस्था दोष की शंका । समवाय संबंध की नित्यता