श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)
Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary
भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३३ २. सप्तगत्यधिकरण [सूत्र ४-५] १. पूर्वपक्ष—इन्द्रियों की सप्त संख्या का प्रतिपादन। १. (सिद्धान्त)—इन्द्रियों की एकादश संख्या का निरूपण।—पृ० ५७५-७८ ३. प्राणाणुत्वाधिकरण [सूत्र ६-७] एकादश इन्द्रियों की अणुता का प्रतिपादन तथा मुख्य प्राण की अणुता का उपपादन। —पृ० ५७८-७९, ४ वायुक्रियाधिकरण [सूत्र ८ ११] मुख्य प्राण की वायुरूपता तथा वायु की क्रियारूपता का खंडन। मुख्य प्राण की जीवोपकरणता का निरूपण। प्राण की पंचवृत्त्यात्मकता का निरूपण।—पृ० ५७९-८३ ५ श्रेष्ठाणुत्वाधिकरण [सूत्र १२] मुख्य प्राण की अणुता का निरूपण। —पृ० ५८३, ६ ज्योत्याद्यधिष्ठानाधिकरण सूत्र [१३-१४] १. पूर्वपक्ष—इन्द्रिय, जीवात्मा तथा अग्नि आदि देवताओं की स्वतंत्र अधिक्रामता की शंका। २. (सिद्धान्त)—परमेश्वरेच्छाधीन अनुष्ठान का निरूपण तथा परमेश्वर के सार्वभौम अधिष्ठान का वर्णन।—पृ० ५८४-८६ ७ इन्द्रियाधिकरण [सूत्र १५-१६] प्राणपद वाच्य चक्षु आदि की इन्द्रियता का भेद श्रुति और स्वभाव वैलक्षण्य के आधार पर मुख्य प्राण की अनिन्द्रियता का निरूपण। —पृ० ५८६-८७, ८ संज्ञामूर्त्तिक्लृप्ति अधिकरण [सूत्र १७-१९] १. पूर्वपक्ष—व्यष्टि जागतिक सृष्टि की हिरण्यगर्भ कर्त्तृता पर शंका। २. (सिद्धान्त)—व्यष्टि जगत सृष्टि की परमात्मकत्तृता का निरूपण। १. पूर्वपक्ष—व्यष्टि सृष्टि की जीव कर्त्तृता की शंका। २. (सिद्धान्त)—ब्रह्माण्ड सृष्टि प्रकरणीय "त्रिवृत्करण" का अर्थान्तर निरूपण।