श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)
Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary
भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमते वेदान्त महादेशिकाय नमः अनन्त श्री जगद्गुरु निम्बार्काचार्य स्वामी श्री राधाकृष्ण र्ज महाराज के बालक स्वामी श्री ललित कृष्ण जी महाराज ने श्री भाष्य का हिन्दी में विवर्त्त (अनुवाद) किया है, हमने इसको देखा है, अनुवाद में मूल का आशय स्पष्ट किया गया है । साम्प्रदायिक अर्थ परम्परा क भंग कहीं भी दृष्टिगत नहीं होता । सनातन भागवत धर्मरूपी एक ही वटवृक्ष की श्री निम्बार्क श्री रामानुज, श्री मध्व, श्री वल्लभ आदि अनेक शाखायें हैं, स. शाखाओं में जो व्यापक भावना है, इस अनुवाद में उसी का दर्शन हो रहा है । अनुवादक ने निम्बार्क सम्प्रदायी होते हुए भी श्री भाष्य क अनुवाद किया हैयह भागवत धर्म की व्यापकता का ही दर्शन है । इस से सब शाखाओं के वैष्णवों को समन्वय भाव का समादर करने की प्रेरण मिलती है । हिन्दी में भगवान श्री रामानुजाचार्य जी के श्री सूक्तिरूप अमृत के पान करने की अभिलाषा रखने वाले जनों को इससे आत्मतृप्ति [L1