श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
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[ 7/155 श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत मध्यलीला श्रीरूप-रघुनाथ-पदे यार आश। अनुवाद—श्रीरूप-रघुनाथ गोस्वामीके चरणकमलोंकी चैतन्यचरितामृत कहे कृष्णदास ॥ 155 ॥ कृपाभिलाषा करते हुए कृष्णदास इस चैतन्यचरितामृतका वर्णन कर रहा है॥ 155 ॥ इति श्रीचैतन्यचरितामृते मध्यखण्डे दक्षिणयात्रायां 'वासुदेवोद्धारो' नाम सप्तम-परिच्छेदः। श्रीचैतन्यचरितामृतके मध्यखण्डके अन्तर्गत दक्षिणयात्रामें 'वासुदेव-उद्धार' नामक सातवाँ अध्याय समाप्त। 230 ।